'अकेले DM पर 5 लाख जुर्माना क्यों?' मेधा रूपम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
Medha Roopam Update : दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानि एनएसए लगाने व हाईकोर्ट द्वारा डीएम के वेतन से 5 लाख रुपये हर्जाना वसूलने को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ने अहम् टिप्पणी की है। बता दें इस टिप्पणी से अधिकारी मेधा रूपम को जरूर राहत मिली है, मगर कोर्ट ने फिलहाल फैसला सुरक्षित रख लिया है।
बता दें, जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम की याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर रासुका लगाने की प्रक्रिया पांच चरणों से होकर गुजरती है जिसमें कई अधिकारी शामिल होते हैं, तो अकेले डीएम को अलग थलग करके उन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना नहीं लगाया जा सकता।
पांच चरणों के बाद डीएम तक पहुंचती है फाइल
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि रासुका के तहत हिरासत का आदेश सीधे नहीं जारी होता। थाना प्रभारी (SHO), डीसीपी (DCP) और पुलिस कमिश्नर से रिपोर्ट गुजरने के बाद ही फाइल डीएम के पास आती है। इसके अलावा एडवाइजरी बोर्ड भी इस पर विचार करता है।
सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि वैधानिक सुरक्षा उपायों का पालन होने के बाद ही डीएम अपनी राय बनाते हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जब पूरी व्यवस्था ऊपर से नीचे तक शामिल है, तो सिर्फ एक अधिकारी को निशाना बनाना सही नहीं है।
नोएडा वर्कर्स प्रोटेस्ट से जुड़ा है विवाद
बता दें, पूरा विवाद अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जहां मजदूरी बढ़ाने की मांग की जा रही थी। इस मामले में 25 साल की स्टूडेंट आकृति चौधरी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था और 13 मई को उन पर एनएसए लगा दिया गया था।
इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को छात्रा की हिरासत रद्द करते हुए इसे राज्य द्वारा गढ़ी गई कहानी बताया था और मुआवजा वसूलने के आदेश दिए थे, जिसके खिलाफ डीएम ने शीर्ष अदालत में अपील की है। इसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चली।
यह भी पढ़ें - Badaun Encounter: बदायूं में पुलिस और गो तस्कर के बीच मुठभेड़, 25 हजार का इनामी जुम्मन गिरफ्तार, दारोगा भी घायल

Join Channel