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उत्तराखंड: 'AAP' के चुनावी गारंटी कार्ड के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल, आठ जनवरी को होगी अगली सुनवाई

त्तराखंड उच्च न्यायालय 300 यूनिट बिजली निशुल्क उपलब्ध कराने के लिए आप के गारंटी कार्ड देने संबंधी योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर अगली सुनवाई आठ जनवरी को करेगा।
उत्तराखंड: 'AAP' के चुनावी गारंटी कार्ड के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल, आठ जनवरी को होगी अगली सुनवाई
उत्तराखंड में अगले कुछ महीनों में विधानसभा के चुनावा है, ऐसे में आम आदमी पार्टी (आप) ने वहां की जनता से कई चुनावी वादें किए है। लेकिन पार्टी के चुनावी वादों के बीच एक अड़चन आ गई है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय 300 यूनिट बिजली निशुल्क उपलब्ध कराने के लिए आप के गारंटी कार्ड देने संबंधी योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर अगली सुनवाई आठ जनवरी को करेगा। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई शुरू की। 
कर्नल अजय कोठियाल ने सत्ता में आने पर जनता को 300 यूनिट निशुल्क बिजली 
देहरादून जिले के विकासनगर क्षेत्र के निवासी और उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व सदस्य संजय जैन ने अपनी याचिका में कहा है कि आप नेता कर्नल अजय कोठियाल ने सत्ता में आने पर प्रदेश की जनता को 300 यूनिट बिजली निशुल्क उपलब्ध कराने का वादा किया है।  
एक मोबाइल नंबर पर मिस्ड कॉल देनी होगी 
याचिका के अनुसार, 300 यूनिट मुफ्त बिजली का गारंटी कार्ड हासिल करने के लिए लोगों को पार्टी द्वारा जारी एक मोबाइल नंबर पर मिस्ड कॉल देनी होगी , इसके बाद उन्हें गारंटी कार्ड प्राप्त होगा जो लोगों को अपने पास रखना होगा और जब आप राज्य में सरकार बनाएगी तो इस कार्ड का इस्तेमाल 300 यूनिट बिजली निशुल्क प्राप्त करने के लिए ​किया जा सकेगा। 
इसे पूरी तरह से अंसवैधानिक बताते हुए याचिका में आरोप लगाया गया है कि आप राज्य में सत्तारूढ नहीं है और इसलिए ऐसे गारंटी कार्ड के लिए लोगों से कहना लोक जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 के विरूद्ध है। याचिका में कहा गया है कि आप का यह कृत्य भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है, क्योंकि इससे जनता गुमराह हो रही है इसलिए इसे आदर्श आचार संहिता के तहत प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। 
याचिकाकर्ता ने कहा कि वह निशुल्क बिजली देने के प्रस्ताव के विरोध में नहीं है लेकिन सत्ता में आए बिना गारंटी कार्ड देना जनता के साथ धोखा है। जनहित याचिका में कोठियाल, निर्वाचन आयोग, भारत सरकार और उत्तराखंड निर्वाचन आयोग और आम आदमी पार्टी को पक्षकार बनाया गया है।

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