नगरासू गुरुद्वारा विवाद शांत होने के बीच पंजाब से उत्तराखंड पहुंचे निहंग सिख, अलर्ट हुआ प्रशासन
Nagarasu Gurudwara Dispute Update: उत्तराखंड के कर्णप्रयाग और नगरासू में हाल ही में हुए विवादों के बीच पंजाब से निहंग सिखों का एक जत्था उत्तराखंड (Nihang Sikh Jatha Uttarakhand) की ओर रवाना हुआ है। यह जत्था मोहाली के गुरुद्वारा सिंह शहीदान से निकला और यात्रा के दौरान उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर स्थित पांवटा साहिब गुरुद्वारे पहुंचा। यहां कुछ समय रुकने के बाद जत्था आगे के सफर के लिए निकल गया। हाल के दिनों में नगरासू और कर्णप्रयाग की घटनाओं के बाद निहंग सिखों की गतिविधियां बढ़ी हैं। इसी वजह से प्रशासन भी इस यात्रा पर नजर बनाए हुए है।
रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारा साहिब में पिछले चार दिनों से चल रहा विवाद मंगलवार को समाप्त हो गया। गुरुद्वारे की छत पर बैठे सभी निहंग सिख शाम के समय नीचे उतर आए और बाद में वहां से रवाना हो गए। विवाद खत्म होने के बाद स्थानीय लोगों और प्रशासन ने राहत महसूस की। कई दिनों से यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ था और इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई थी।
Rudraprayag Gurudwara Controversy: कैसे शुरू हुआ था मामला?

जानकारी के मुताबिक, 20 जून को सात निहंग सिख नगरासू गुरुद्वारा पहुंचे थे। यहां किसी मुद्दे को लेकर उनका गुरुद्वारा प्रबंधन से मतभेद हो गया। धीरे-धीरे यह विवाद बढ़ गया और निहंग सिख विरोध जताने के लिए गुरुद्वारे की छत पर बैठ गए।
बताया जाता है कि ये सभी हेमकुंड साहिब की यात्रा पर निकले थे। उन्होंने ठहरने के लिए अतिरिक्त कमरों की मांग की थी, लेकिन गुरुद्वारा प्रबंधन उनकी यह मांग पूरी नहीं कर पाया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया।
#WATCH | Kulhal, Uttarakhand: Amid disputes in Karnaprayag and Nagrasu, a Nihang jatha that left Gurdwara Singh Shaheedan in Mohali today for the Uttarakhand capital has arrived at Paonta Sahib Gurdwara on the Uttarakhand-Himachal border. pic.twitter.com/Bad26P44kQ
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) June 25, 2026
Uttarakhand Nihang Sikh News: कर्णप्रयाग की घटना भी बनी वजह

नगरासू विवाद के पीछे कर्णप्रयाग की घटना को भी एक कारण माना जा रहा है। 16 जून को कर्णप्रयाग में कुछ निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद पुलिस ने कुछ निहंग सिखों को गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा है कि नगरासू में मौजूद निहंग सिख अपने साथियों की गिरफ्तारी से नाराज थे और उनकी रिहाई की मांग कर रहे थे। पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस और जिला प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए थे।
किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। 21 जून की रात एक निहंग सिख खुद नीचे उतर आया और उसने आत्मसमर्पण कर दिया। अगले दिन एक अन्य व्यक्ति भोजन लेने के लिए नीचे आया, जिसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हालांकि इस दौरान माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण रहा, लेकिन प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखा।
बातचीत से निकला समाधान
मंगलवार को पंजाब और पांवटा साहिब से आए सिख प्रतिनिधियों ने निहंग सिखों और गुरुद्वारा प्रबंधन के साथ कई दौर की बातचीत की। लंबे विचार-विमर्श के बाद सभी पक्षों के बीच सहमति बन गई। इसके बाद शाम करीब साढ़े चार बजे सभी निहंग सिख सुरक्षित रूप से छत से नीचे उतर आए और अपने वाहनों से आगे के लिए रवाना हो गए। सिख प्रतिनिधियों ने कहा कि निहंग सिख किसी प्रकार की अशांति फैलाने नहीं आए थे, बल्कि वे कुछ घटनाओं को लेकर नाराजगी जता रहे थे।
रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि सभी लोग सुरक्षित हैं और उन्हें उनके गंतव्य के लिए भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। संवाद, धैर्य और आपसी समझदारी के चलते यह विवाद शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया, जिससे प्रशासन, गुरुद्वारा प्रबंधन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
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