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हल्द्वानी हिंसा मामले में अब्दुल मलिक को राहत, सुप्रीम कोर्ट का सवाल- 'थाना जलने पर UAPA कैसे?'

सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी हिंसा के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक की जमानत बरकरार रखी है। अदालत ने राज्य सरकार की याचिका खारिज करते हुए सवाल उठाया कि सिर्फ थाना जलाने पर UAPA कैसे लगाया जा सकता है।
04:27 PM Jul 31, 2026 IST | Rohit Singh
सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी हिंसा के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक की जमानत बरकरार रखी है। अदालत ने राज्य सरकार की याचिका खारिज करते हुए सवाल उठाया कि सिर्फ थाना जलाने पर UAPA कैसे लगाया जा सकता है।
हल्द्वानी हिंसा मामले में अब्दुल मलिक को राहत  सुप्रीम कोर्ट का सवाल   थाना जलने पर uapa कैसे

UAPA Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के चर्चित हल्द्वानी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक को बड़ी राहत दी है। अदालत ने शुक्रवार को मलिक की जमानत बरकरार रखते हुए उत्तराखंड सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी।

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सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने पुलिस और राज्य प्रशासन द्वारा UAPA (यूएपीए) जैसी सख्त धाराओं के इस्तेमाल पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि महज भीड़ द्वारा थाने में आग लगा देने से गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम लागू नहीं हो जाता, क्योंकि पब्लिक ऑर्डर और यूएपीए दो बिल्कुल अलग-अलग बातें हैं।

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तीन जजों की बेंच ने सुनाया फैसला

UAPA Supreme Court

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चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन जजों की बेंच ने इस मामले पर फैसला सुनाया। पीठ ने कहा कि भले ही उत्तराखंड हाई कोर्ट के आदेश में दिए गए कुछ तर्क अधूरे महसूस हो सकते हैं, लेकिन जब बात किसी व्यक्ति की निजी आजादी से जुड़ी हो, तो उसमें हस्तक्षेप करने की कोई ठोस वजह नजर नहीं आती।

क्यों मिली थी राहत?

यह पूरा विवाद उत्तराखंड हाई कोर्ट के 16 अप्रैल 2026 के उस फैसले से शुरू हुआ था, जिसमें अब्दुल मलिक को जमानत मिली थी। मलिक पर 8 फरवरी 2024 को हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में हुई भीषण हिंसा की साजिश रचने और हिंसा भड़काने के आरोप में आईपीसी, आर्म्स एक्ट और यूएपीए की कई धाराओं में केस दर्ज किया गया था।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि जांच रिपोर्टों से पता चलता है कि जिस समय बनभूलपुरा में उपद्रव हुआ, मलिक मौके पर मौजूद ही नहीं था। इसके अलावा, मामले के एक अन्य सह-आरोपी और मलिक के बेटे अब्दुल मोईद को अदालत से पहले ही जमानत मिल चुकी थी।

उत्तराखंड सरकार के तर्क

उत्तराखंड सरकार की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने शीर्ष अदालत में पुरजोर तर्क दिया कि मलिक ही इस पूरे बवाल का असली मास्टरमाइंड था।

उन्होंने कहा कि घटना के वक्त आरोपी का मौके पर न होना कोई मायने नहीं रखता। राज्य सरकार का तर्क था कि हाई कोर्ट ने यूएपीए की धारा 43D(5) के कड़े नियमों को अनदेखा कर एकतरफा आदेश दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की इन तमाम दलीलों को खारिज करते हुए अब्दुल मलिक की रिहाई का रास्ता साफ रख दिया।

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Rohit Singh

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रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।

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