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100 करोड़ लोगों का टीकाकरण

आज भारत में सौ करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाने का आंकड़ा छूने की उम्मीद है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। देश में 16 जनवरी से वैक्सीनेशन अभियान की शुरूआत की गई थी।
100 करोड़ लोगों का टीकाकरण
आज भारत में सौ करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाने का आंकड़ा छूने की उम्मीद है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। देश में 16 जनवरी से वैक्सीनेशन अभियान की शुरूआत की गई थी। शुरूआती 20 करोड़ वैक्सीन डोज 131 दिन में लगी। 80 करोड़ से सौ करोड़ होने में 31 दिन लेकिन देश की महज 21 फीसदी आबादी ही पूरी तरह वैक्सीनेट हुई है। भारत के टीकाकरण अभियान की विश्व भर में प्रशंसा हो रही है। विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मलपास ने हाल ही में वाशिंगटन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भेंट के दौरान कोराेना महामारी के खिलाफ सफल टीकाकरण ​अभियान के लिए भारत को बधाई दी है। 
कोरोना वैक्सीनेशन में भारत केवल चीन से ही पीछे है। चीन में दो अरब से ज्यादा खुराक दी जा चुकी है। वैक्सीनेशन मामले में भारत अमेरिका से कहीं अधिक अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। बाकी देश हमसे पीछे ही हैं। भारत की विशाल जनसंख्या को देखते हुए टीकाकरण अभियान अपने आप में बहुत बड़ी चुनौती थी लेकिन हमने महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। निःसंदेह हमने यह पड़ाव टीकों की उपलब्धता, कीमतों को तर्कसंगत बनाकर, डोज के बीच पर्याप्त अंतर निर्धारित की चुनौती से जूझते हुए हासिल किया है। टीकाकरण का उद्देश्य यही था​ कि समाज के हर वर्ग को वैक्सीनेट कर उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जाए।
देशवासी पहले की तरह सामान्य जनजीवन व्यतीत कर सकें। यह खबर भी बहुत राहत भरी है कि 2020 के बाद बीमारी से ठीक होने वालों का प्रतिशत 98 फीसदी हुआ है और संक्रमितों की संख्या दो लाख से कम होना एक बड़ी उपल​ब्धि है। हमारा लक्ष्य तभी पूरा होगा जब हम पूरी युवा आबादी को दोनों डोज दे पाएं। अब दो से 18 वर्ष तक बच्चों का टीकाकरण करने का अभियान भी शुरू होने वाला है। भारत ने अपने उपलब्ध संसाधनों और सवा अरब से ज्यादा की जनसंख्या के ​लिए टीका उत्पादन, वितरण और टीका लगाने का महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल किया है। भारत के अनुसंधानकर्ताओं ने देश में दो-दो सफलतम टीके तैयार करके पूरी दुनिया में अपनी धाक जमा ली है। यही कारण है कि दुनिया भर में भारत के प्रयासों की सराहना हो रही है। सीरो सर्वे बता रहे हैं कि टीका लगवाने वाले 81.6 फीसदी लोगों में एंटीबाडी पाया गया है। यह इस बात का प्रमाण है कि हमारा टीका प्रभावी और सुरक्षा चक्र उपलब्ध करा रहा है।
टीकाकरण अयिभान ने देश में आर्थिक गतिविधियां फिर से पटरी पर लाने में बड़ी भूमिका​ निभाई है। अब जबकि कोरोना पाबंदियों को लगभग हटाया जा चुका है। भले ही लोगों का आत्मविश्वास बढ़ा है, भले ही हम टीकाकरण में आगे दिखाई दें लेकिन हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि महामारी का खतरा टला नहीं है। देश की 80 फीसदी यात्रा अभी शेष है। हमें तेजी से यह यात्रा पूरी करनी होगी। 
लोग सवाल करने लगे हैं कि हम मास्क फ्री कब होंगे। लोगों ने दीपावली पर मास्क फ्री होने की उम्मीदें पाल रखी हैं। हमें अभी आत्मसंतुष्टता के साथ किसी भी जोखिम से बचना होगा। दुनिया के कई देशों में तीसरी और चौथी लहर दस्तक दे चुकी है। हमें इस स्थिति से बचना होगा। ज्यादतर लोग मास्क नहीं लगा रहे, या फिर मास्क लटका तो रखा है केवल दिखाने के​ लिए। हम मास्क फ्री तब हो सकते हैं जब हमारी 50 फीसदी आबादी को टीकों की दोनों डोज लग चुकी हो। जिन देशों ने मास्क फ्री किया है उनमें 50 फीसदी से ज्यादा आबादी पूरी तरह वैक्सीनेश हो चुकी है। ब्रिटेन, अमेरिका, स्वीडन, चीन, न्यूजीलैंड , हंगरी, इटली के बाद सऊदी अरब में अब पूूरी तरह वैक्सीनेटेड लोगों के लिए मास्क मेंडेटरी नहीं है। इस्राइल पहला देश था जहां पूरी तरह से वैक्सीनेटेड लोगों को मास्क नहीं लगाने की छूट दी गई। हालांकि डेल्टा वैरिएट की वजह से मामले दोबारा बढ़ने पर मास्क लगाना फिर से अनिवार्य कर दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक 85 फीसदी आबादी पूूरी तरह वैक्सीनेट नहीं हो जाती तब तक ऐेसा करना खतरनाक होगा। जिन देशों में मास्क से छूट दी है वहां जनसंख्या का घनत्व भारत की तुलना में बहुत कम है। 85 फीसदी आबादी के पूरी तरह वैक्सीनेटेड होने तक भारत हर्ड इम्युनिटी हासिल कर लेगा। इस तरह हमें मास्क से मुक्ति के​ लिए सात-आठ महीने इंतजार करना पड़ेगा। आने वाले महीनों में दीवाली के बाद उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनावों की हलचल शुरू हो जाएगी। चुनावी पर्व  को देखते हुए हमें अधिक सतर्कता की जरूरत होगी। चुनाव आयोग को सुनिश्चित करना होगा कि चुनाव अभियान कोरोना के हॉट स्पॉट न बन जाएं। अति आत्मविश्वास में लोगों को भी मास्क पहनना नहीं भूलना चाहिए आैर अभी भी सोशल डिस्टैंसिंग बनाए रखना चाहिए। कोई भी लापरवाही हमारे लिए घातक सिद्ध हो सकती है। टीकाकरण अभियान की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था पर दुनिया का भरोसा बढ़ा है। अन्तर्राष्ट्रीय रेटिंग एजैंसियों ने भारत की रेटिंग में सुधार किया है। देश की अर्थव्यवस्था को फिर से रास्ते पर लाने के लिए हम सभी को सतर्कता बरतनी होगी। टीकाकरण अभियान में जुटे मैडिकल कर्मियों, सतत् निगरानी रख रहे डाक्टरों और व्यवस्था बनाने वाले कर्मचारियों को एक अरब आबादी का टीकाकरण करने पर बहुत-बहुत बधाई।
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