W3Schools
For the best experience, open
https://m.punjabkesari.com
on your mobile browser.
Advertisement

काशी का ‘चॉकलेट वाला मंदिर’! जहां लड्डू नहीं, टॉफी और बिस्किट से खुश होते हैं बटुक भैरव

02:45 PM Apr 09, 2026 IST | Khushi Srivastava
काशी का ‘चॉकलेट वाला मंदिर’  जहां लड्डू नहीं  टॉफी और बिस्किट से खुश होते हैं बटुक भैरव
Varanasi Batuk Bhairav Temple Mystery (AI Generated)

Varanasi Batuk Bhairav Temple Mystery: महादेव की नगरी काशी के हर हिस्से में भगवान शिव का वास है। यहां बाबा भैरव को शहर का कोतवाल माना जाता है। पर क्या आपको पता है कि वाराणसी में एक ऐसा मंदिर भी है जहां भगवान को लड्डू या पेड़ा नहीं, बल्कि चॉकलेट, टॉफी और बिस्किट चढ़ाए जाते हैं? हम बात कर रहे हैं काशी के बटुक भैरव मंदिर की, जहां भक्तों की श्रद्धा दिखाने का तरीका बहुत अनोख और प्यारा है।

Advertisement

Varanasi Batuk Bhairav Temple Mystery: बाल रूप में विराजमान हैं बटुक भैरव

Varanasi Batuk Bhairav Temple (1)
Varanasi Batuk Bhairav Temple (Source: Social Media)

इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां भगवान भैरव एक छोटे बालक के रूप में मौजूद हैं। 'बटुक' का मतलब ही बालक होता है। जैसे हम छोटे बच्चों को खुश करने के लिए उन्हें उनकी पसंद की चीजें देते हैं, वैसे ही भक्त यहां भगवान को खुश करने के लिए खिलौने और टॉफियां लेकर आते हैं।

Advertisement

Varanasi Batuk Bhairav Temple Mystery: चॉकलेट और बिस्किट का प्रसाद

यहां की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि भक्त भगवान को टॉफी, चॉकलेट और बिस्किट का भोग लगाते हैं। माना जाता है कि बटुक भैरव को ये चीजें बहुत पसंद हैं। लोग बड़े प्यार से ये चीजें भगवान को चढ़ाते हैं और उन्हें एक छोटे बच्चे की तरह लाड-प्यार करते हैं।

Advertisement

संतान सुख के लिए उमड़ती है भीड़

इस मंदिर में वे लोग ज्यादा आते हैं जो संतान सुख चाहते हैं या अपने बच्चों की सुरक्षा और तरक्की की दुआ करते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां पूजा करने से बच्चों से जुड़ी परेशानियां खत्म होती हैं और जीवन में साहस और सकारात्मकता आती है।

Varanasi Batuk Bhairav Temple: दोष और बीमारियां होती हैं दूर

Varanasi Batuk Bhairav Temple (2)
Varanasi Batuk Bhairav Temple (Source: Social Media)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बटुक भैरव के दर्शन से शरीर और मन की बीमारियां दूर होती हैं। साथ ही, कुंडली के राहु-केतु दोष और बुरी शक्तियों का असर भी खत्म हो जाता है। मंदिर में बने हवन कुंड में पूजा करके भक्त अपनी खास इच्छाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।
यह भी पढ़ें-कर्नाटक का अद्भुत हरिहरेश्वर मंदिर, जहां एक ही रूप में मिलते हैं शिव और विष्णु
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता या वैज्ञानिक पुष्टि नहीं करता है।
Advertisement
Author Image

Khushi Srivastava

View all posts

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।

Advertisement
Advertisement
×