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16 या 17 मई, कब है वट सावित्री व्रत? नोट कर लें बरगद पूजा की स्टेप-बाय-स्टेप विधि

11:19 AM May 06, 2026 IST | Khushi Srivastava
16 या 17 मई  कब है वट सावित्री व्रत  नोट कर लें बरगद पूजा की स्टेप बाय स्टेप विधि
Vat Savitri Vrat 2026 Kab Hai (AI Generated)

Vat Savitri Vrat 2026 Kab Hai: हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का बहुत महत्व होता है, ये व्रत साल में दो बार आता है। भारत के कुछ हिस्सों में महिलाएं इसे ज्येष्ठ अमावस्या को रखती हैं, तो कुछ जगहों पर इसे ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में ज्येष्ठ अमावस्या वाला व्रत मुख्य रूप से रखा जाता है। इस व्रत में मुख्य रूप से बरगद (वट) के पेड़ की पूजा की जाती है और सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा सुनी जाती है।

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Vat Savitri Vrat 2026 Kab Hai: वट सावित्री व्रत 2026 की तिथि

साल 2026 में ज्येष्ठ अमावस्या तिथि की शुरूआत 16 मई 2026 को सुबह 05:11 बजे से होगी, जिसका समापन 17 मई की सुबह 01:30 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, वट सावित्री का व्रत 16 मई को रखा जाएगा।

पूजा करने का सही तरीका

  • व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सोलह श्रृंगार करें।
  • एक टोकरी में पूजा का सारा सामान जैसे फल, फूल, भीगे चने, धूप-दीप और कच्चा सूत रखकर बरगद के पेड़ के पास जाएं।
  • सबसे पहले पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं। इसके बाद धूप-दीपक जलाकर भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं।
  • पूजा के दौरान हाथ वाले पंखे से बरगद के पेड़ को हवा की जाती है।
  • महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करते हुए बरगद के पेड़ के चारों ओर 7 बार कच्चा धागा लपेटती हैं और परिक्रमा करती हैं।
  • पूजा के अंत में पेड़ के नीचे बैठकर सावित्री और सत्यवान की कहानी सुनी जाती है।
  • घर लौटने के बाद उसी हाथ वाले पंखे से पति को हवा करें और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें। शाम को पूजा के फल खाकर मीठा भोजन करना चाहिए।

इस व्रत का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का बहुत बड़ा महत्व है। माना जाता है कि जो महिला बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर पूरी श्रद्धा से पूजा और कथा सुनती है, उसकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। यह व्रत मुख्य रूप से पति की लंबी उम्र और उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जैसे माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले लिए थे, वैसी ही शक्ति और सुख की प्राप्ति के लिए सुहागिन महिलाएं यह व्रत करती हैं।
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Khushi Srivastava

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खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।

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