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पंजाब के कई इलाकों की ऊंची बिल्डिंगों की छतों से दिखे हिमाचल की पहाड़ियों के नजारे

लुधियाना-जालंधर : कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप के बीच आज पंजाब के कई इलाकों से सुखद खबरें प्राप्त हुई है, इन्हीं खबरों के बीच जालंधर, लुधियाना में बनी ऊंची इमारतों से शिमला और पठानकोट की पहाड़ियों पर बिखरी बर्फ से ढकी चोटियां दिखाई दी। कोरोना वायरस को लेकर जहां देशभर में लॉकडाउन है और जिंदगी की तेज रफ्तार थमी हुई है, वही दूसरी तरफ फैक्ट्रीयों और लाखों वाहनों के थमे पहियों के चलते वातावरण साफ और शुदध दिखाई देता है। आज जालंधर की ऊंची बिल्डिंगों की छतों से हिमाचल प्रदेश की पहाडिय़ां अचानक दिखाई दी। लोग मनोरंजन के चलते इन तस्वीरों को शेयर कर रहे है। 
जबकि प्रदूषण की कमी के चलते आसमान धीरे-धीरे साफ होकर नीले रंग का दिखाई देता है। जिस कारण 200 से 300 किमी दूर शिवालिक और हिमाचल पर्वत से लदे आसानी से दिखाई दे रहे है। इसी साफ वातावरण में पंछियों की चहचहाहट और अलग-अलग जातियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। मानव चाहे इस महामारी के चलते अपने घरों में कैद रहने को मजबूर है लेकिन दूसरी तरफ पंछियों की अलगअलग प्रजातियां इस साफ वातावरण का आंनद ले रही है।
स्मरण रहे कि पिछले कई दिन से चल रहे कर्फ्यू के कारण जहां लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है, वहीं प्रकृति और पर्यावरण को बहुत फायदा पहुंचा। वायु प्रदूषण न फैलने से शहर का वातावरण बिल्कुल साफ हो गया है। ऐसे में शहर के बाहरी इलाकों से हिमाचल प्रदेश के धौलाधार पहाड़ दिखने लगे हैं।

शुक्रवार सुबह गदईपुर के बाहरी हिस्से से ये सभी पहाड़ साफ दिखे। क्षेत्र के लोग घरों की छत पर चढक़र इन्हें देखने जुटने लगे। विशेषज्ञों के मुताबिक 30 वर्ष बाद हवा इतनी साफ हुई है कि 200 किमी. दूर ये पहाड़ जालंधर के लोगों को दिखाई दिए हैं।   दोआबा कॉलेज में भूगोलशास्त्र के विभाग प्रमुख प्रो. दलजीत सिंह ने बताया कि जालंधर से देखते वक्त जो पहाड़ दिख रहे हैं वे धौलाधार शृंखला के हैं। डलहौजी के ऊपर वाले बर्फीले पर्वत। बचपन में यह नजारा देखा हो तो पता नहीं लेकिन सुना बेशक है।

शहर के बाकी हिस्से में भी लोग छतों पर आकर इस नजारे को देख रहे हैं। कोई दूरबीन लेकर नजारे को निहार रहा था तो कोई इसे अपने कैमरे में कैद करने में जुटा था। बच्चे हों या बड़े हर किसी का उत्साह देखते ही बन रहा है। शहरवासी प्रकृति की खूबसूरती निहार कर हैरान है। प्रदूषण के कारण लोगों को कभी पता नहीं चला कि शहर से हिमाचल के पहाड़ देखे जा सकते हैं।

इस नजारे की चर्चा ट्विटर तक जा पहुंची है। भारतीय वन सेवा के अधिकारी सुशांत नंदा ने अपने ट्विटर हैंडल से पोस्ट करते हुए लिखा कि प्रकृति कैसी है और हमने इसके साथ क्या कर दिया है। उन्होंने लिखा कि जालंधर में धौलाधार पहाड़ 30 वर्ष बाद नजर आए हैं।

- रीना अरोड़ा
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