जल जीवन हरियाली के बगैर प्राकृतिक असुरक्षित नहीं : श्रवण कुमार

पटना : बिहार विधान परिषद के शीतकालीन सत्र में जल-जीवन एवं हरियाली विषय पर विशेष वाद विवाद में सरकार की ओर सेउत्तर देते हुए ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या मानवीय गतिविधि एवं प्राकृतिक असंतुलन तथा जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न परिस्थितिकीय चु नौतियों से निबटने और बिहार में पर्यावरण संतुलन का संधारण करने के व्यापक एवं बहुआयामी उद्देश्य से जल को प्रदूषण मुक्त रखने, जल स्तर का संतुलन बनाये रखने, पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित कर ने, हरित आच्छादन बढ़ाने, ऊर्जा बचत पर बल देने, परिवेश के अनुरूप कृषि एवं अन्य संबद्ध गतिविधियों को नया आयाम देने के लिए राज्य सरकार द्वारा जल जीवन हरियाली पर गंभीरता पूर्वक कार्य किया जा रहा है इसे मिशन मोड में पूरा कर ने के लिए मुख्यमत्री के दिशा निर्देशन में जल जीवन हरियाली मिशन का गठन भी किया गया है।

उन्होंने बताया कि जब राज्य में हमें सरकार बनाने का अवसर प्राप्त हुआ था उस समय हरित आच्छादन मात्र 9 प्रतिशत थी। हमने प्रयास कर इसे 15 प्रतिशत तक पहुंचाया है। मुख्यमंत्री ने 17 प्रतिशत हरित आच्छादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। हम इस दिशा में लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री जी  लगातार हरित आच्छादन को बढ़ाने के लिए भारत का पहला राज्य बिहार है जहां पार्टी का साधारण के लिए एक पौधा और सक्रिय सदस्य 25 पौधा लगाकर पूरे देश और दुनिया को संदेश दिया।

 मनरेगा के अन्तर्गत सामाजिक वानिकी के तहत हमने विगत दो वर्षों से सघन वृक्षारोपण अभियान चलाकर लगभग एक करोड़ पौधे लगायें हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के साथ मिलकर वर्ष 2019-20 में लगभग एक करोड़ 25  लाख पौधा रोपण कर हरित आच्छादन बढ़ाने का काम किया। वर्ष 2018-19 में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 42 लाख 27 हजार तथा 2019-20 में अब तक  45 लाख 41 हजार पौधा रोपण किया गया है। अगले वर्ष में उपमुख्यमंत्र सुशील कुमार मोदी ारा दो करोकड़ 50 लाख पौधा रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया है।

ग्रामीण विकास मंत्री ने बताया कि स्वच्छ एवं संतुलित पर्यावरण के लिए पृथ्वी पर 33 प्रतिशत हरियाली आच्छादन की आवश्यकता का मानक है। हम इस मानक को प्राप्त करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं इसके लिए जल जीवन हरियाली मिशन एक बेहतर प्रयोग साबित होगा। यूं तो  भारत सरकार भी इस दिशा में चिंतित है। उन्होंने जल शक्ति  मंत्रालय का गठन कर जल शक्ति अभियान की शुरूआत की है। बिहार के 12 जिलों के 30 प्रखंडों को इसमें सम्मिलित किया गया है लेकिन राज्य में परिस्थितिकीय असंतुलन को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के सभी प्रखंडों एवं पंचायतों में जल जीवन हरियाली मिशन के कार्यान्वयन का निर्णय लिया है। 

जल जीवन हरियाली योजना को सुचारू रूप से चलाने एवं सफल बनाने के लिए राज्य के विभिन्न विभागों ग्रामीण विकास विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, लघु जल संसाधन विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, जल संसाधन विभाग, पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन विभाग, कृषि विभाग, भवन निर्माण विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज विभाग, ऊर्जा विभा तथा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग कुल 15 विभागों को शामिल किया गया है एवं उनके लिए दायित्व का भी निर्धारण कर दिया गया है।

श्रवण कुमार ने बताया कि विगत वर्षों में जलवायु परिवर्तन के फलस्रूप वर्षापात में कमी एवं भूगर्भ जल का अत्यधिक दोहन करने के कारण भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। यह गिरावट किसी खास क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है बल्कि पूरा बिहार इससे प्रभावित है। आहर, पोखर, पईन, छोटी नदियां, पुराने कुआं का सुदृढ़ीकरण करने का फैसला लिया गया है। 

चापाकल, कुआं सरकारी भवन में जल संचय करने के लिए  रेन वाटर हारवेस्टिंग का कार्य करने का निर्णय लिया गया है। छोटी-छोटी नदियों एवं नालों तथा पहाड़ी क्षेत्रों के जल संग्रहण क्षेत्रों में चेकडैम एवं विभिन्न प्रकार के जल संचयन के निर्माण का निर्णय लिया गया है। नदियों के अधिशेष जल को वैसे इलाकों में ले जाया जायेगा जहां जल की कमी है। उन्होंने मुख्यमंत्री जी के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन विषय से सिर्फ बिहार ही चिंतित नहीं बल्कि देश और पूरी दुनिया चिंतित है, देश में बिहार पहला राज्य है जहां विधान मंडल के सभी सदस्यों के साथ विधान मंडल के सेंट्रल हॉल में 13 जुलाई, 2019 को बैठक कर राजनीति एवं दलगत भावनाओं से ऊपर उठकर खुले दिल से सभी सदस्यों ने सुझाव दिया और इस बैठक में राज्य के बड़े अधिकारी से लेकर छोटे अधिकारी भी मौजूद रहे। 

बैठक का परिणाम है कि बिहार में जल जीवन हरियाली योजना तैयार कर राज्य के 8 हजार 392 पंचायतों में कम से कम एक योजना की शुरूआत की गयी है। राज्य में एक ही दिन 26 अक्टूबर, 2019 को ग्रामीण विकास विभाग की 26 हजार 39 एवं अन्य विभागों की 6 हजार 742 कुल 32 हजार से अधिक योजनाओं का उदघाटन एवं शिलान्यास मुख्यमंत्री जी द्वारा कियागया है। कुल 1 हजार 359  करोड़ 27 लाख रुपये खर्च का अनुमान है। यह कार्य जल वायु परिवर्तन से उत्पन्न स्थिति से मुकाबल करने की शुरूआत है।

पर्यावरण प्रदूषण को कम करने एवं हवा को अशुद्ध करने वाले विभिन्न घटकों में से खेतों में पराली, फसल अवशेष जलाना एक बड़ा घटक है। इसके लिए सरकार किसानों को सचेत एवं जागृत कर रही है। सरकार ने निर्देश दिया है कि वैसे किसान जो खेतों में पराली नहीं जलायेंगे, उन्हें पराली के कटाई के लिए मशीन खरीद पर 80 प्रतिशत राशि अनुदान देकर प्रोत्साहित करने का कार्य आरंभ कर दिया गया है।
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