हमें एनआरसी नहीं, नौकरी और तालीम चाहिए : जंग

12:23 PM Jan 21, 2020 | Rajshree
नई दिल्ली : जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई) गेट संख्या सात के बाहर सोमवार को लगातार 38वें दिन भी जारी रहा। दिन-रात नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ बैठे प्रदर्शनकारियों को संबोधित करने दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल व जामिया के पूर्व कुलपति नजीब जंग पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जामिया में बीते 15 दिसंबर 2019 को कैंपस के अंदर घुसकर दिल्ली पुलिस द्वारा विद्यार्थियों पर बर्बरता करने का विरोध किया। 

साथ ही कहा कि यह कितनी दुःखद बात है कि 15 दिसंबर शाम करीब 250 विद्यार्थियों को चोटें आईं हैं। वहीं करीब 10-15 विद्यार्थियों को गंभीर चोटें आई हैं। आज भी उनका मानसिक संतुलन बिगड़ा हुआ है। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कुलपति के आदेश पर विवि में पुलिस घुसकर विद्यार्थियों पर कार्रवाई करती है इससे दुःखद और क्या हो सकता है। 

इस दौरान जंग ने कहा कि सीएए में सुधार की जरूरत है, या तो मुसलमानों को इसमें शामिल करना चाहिए या सभी को हटा देना चाहिए। सरकार इसे समावेशी बनाए, मामला अपने आप खारिज हो जाएगा। साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री को प्रदर्शनकारियों से बातचीत करनी चाहिए। इससे भी मामला सुलझेगा। अगर हम बात नहीं करेंगे तो समाधान कैसे होगा? उन्होंने मौके पर संविधान की प्रस्तावना पढ़ी और राष्ट्रगान गाया।

हमें नौकरी और अस्पताल चाहिए...नजीब जंग ने कहा कि हमें नौकरी, अस्पताल, शिक्षा चाहिए न कि एनपीआर। क्या नेपाल से लोग हिंदुस्तान नहीं आना चाहते? जो धर्म छूट गया है उसको जोड़ लीजिए या फिर सबको हटा दीजिए। पूर्व उपराज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि हम एनआरसी नहीं ला रहे हैं। 

लेकिन लोग उन पर विश्वास नहीं कर रहे हैं। इसकी वजह क्या है? प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि डिटेंशन सेंटर नहीं बन रहे हैं लेकिन सच्चाई है कि असम, कर्नाटक और नवी मुंबई में सेंटर तैयार किए जा रहे हैं। इसलिए लोग विश्वास नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को प्रेस वार्ता कर कहना चाहिए कि वह एनआरसी नहीं ला रहे हैं।

मौलानाओं को दूर रखने की दी सलाह...
नागरिकता कानून को लेकर जामिया प्रदर्शन को मजबूत करने की बात भी पूर्व एलजी नजीब जंग ने कही है। साथ ही उन्होंने कहा कि मैं आपसे एक और बात करना चाहता हूं। शायद इससे कुछ लोगों को बुरा लगे। जंग ने कहा कि यह तारीख जामिया ने लिखी है और अच्छी बात है यह आंदोलन यहां चल रहा है। लेकिन मौलानाओं के इससे दूर रखिए। आप अपने मदरसे में बैठें, इसे लीड हमारे बच्चे करेंगे। जो अब्र यहां से उठेगा वो सारे जहां पर बरसेगा।