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हमें इसके साथ जीना सीखना होगा...

हमें इसके साथ जीना सीखना होगा...
आज सारा विश्व कोरोना जैसी महामारी से लड़ रहा है। भारत में मोदी जी और सारे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के दिशा-निर्देश में सफल लॉकडाउन का पालन हुआ क्योंकि जान है तो जहान है और भय बिन न हो प्रीत। सब लोग भय से लॉकडाउन का पालन कर रहे थे और कुछ लोग जिन्होंने  मजबूरीवश या न समझते हुए उल्लंघन किया वह इसकी चपेट में आ गए। बहुत से जमीन के फरिश्ते इसके लिए मेहनत कर रहे हैं। चाहे डॉक्टर हों, सिपाही हों, वालंटियर हों, हैल्पर और सामाजिक संस्थाएं हों, सब मिलकर चल रहे हैं।
हमारे वरिष्ठ नागरिक क्लब के सदस्य हर समय हैल्पलाइन पर मैसेज डालते  हैं। बोर हो गए, क्या करें तो हमने ZOOM से उनसे सम्पर्क किया। व्हाट्सएप वीडियो कॉल से सम्पर्क किया। उनसे उनके समय बिताने के अनुभव सुने और सुनाए क्योंकि अब समय की डिमांड है कि  हमें अपना लाइफ स्टाइल बदलना होगा। इसी के साथ जीना भी सीखना होगा। यहां तक कि हम पिछले कई सालों से 12 मई को बहुत बड़ा महामृत्युंजय जाप का आयोजन करते थे ताकि जो बुजुर्ग अस्वस्थ हैं उनके स्वास्थ्य के लिए और सबकी मंगल कामना के लिए। इस बार भी गैप न पड़े क्योंकि यह सबका मनपसंद प्रोग्राम है तो हमने शंकर साहनी जी को लाइव प्रोग्राम करने की प्रार्थना की और उन्होंने मानी और हमने सबके लिए आनलाइन प्रोग्राम किया। कहने का भाव है हमें अपने आपको इस माहौल के अनुसार ढालना होगा।
अब सबको लॉकडाउन खुलने का इंतजार है क्योंकि हम सब जानते हैं कि सरकार एक निश्चित समय तक ही लॉकडाउन रख सकती है। धीरे-धीरे लॉकडाउन खत्म हो जाएगा। सरकार भी इतनी सख्ती नहीं दिखाएगी क्योंकि सरकार ने आपको कोरोना बीमारी के बारे में बता दिया है। कई तरीके यानी सोशल डिस्टैंटिंग, हैंड सेनिटाइजेशन, मास्क पहनना, अपने आपको कैसे सुरक्षित रखना, सब सिखा दिया है क्योंकि हम सब देख रहे हैं कि बीमार होने के बाद क्या हाल होता है सब समझ और देख रहे हैं। मेरी लंदन में रह रही बहन नीना शर्मा का बेरिस्टर बेटा संजीव शर्मा 28 दिन वेंटीलेटर पर रहकर स्वस्थ हुआ है।
कोई भी सरकार हमारी 24 घंटे चौकीदारी नहीं कर सकती। इसलिए मेरी आप सबसे प्रार्थना है कि  लॉकडाउन अगर खुल भी जाता है तो अगर जरूरत है तो ही बाहर सोच-समझ कर निकलें, क्योंकि मुझे नहीं लगता 17 मई या आगे आने वाले लगभग एक साल तक कोरोना चला जाएगा और हम पहले जैसा जीवन जी सकेंगे। अब इस वायरस की जड़ें फैल गई हैं। इसलिए हम सबको इससे लडऩा पड़ेगा और हालात के अनुसार चलना होगा। हमें अपनी इम्युनिटी स्ट्रांग करनी है। हम अक्सर कहते हैं ओल्ड इज गोल्ड तो हमें अपनी सैकड़ों साल पुरानी जीवनशैली भी अपनानी पड़ेगी। शुद्ध आहार, शुद्ध मसाले, आंवला, एलोवेरा, गिलोये, काली मिर्च, लौंग आदि को अपने खाने में अहमियत देनी होगी। हमें घर की शुद्ध चीजें खानी होंगी। बच्चों को भी बाहर की चीजें खाने पर मना करना होगा। मुश्किल है परन्तु कोशिश करनी पड़ेगी। हमें महाशय धर्मपाल जी से जीवन जीने की शैली सीखनी पड़ेगी, जो इस उम्र में भी जीवन को कैसे जिया जाता है, के लिए प्रोत्साहित करते हैं। 
वैसे कोरोना ने हम सबकी जिन्दगी में बदलाव कर दिया है। यहां तक कि सोच में परिवर्तन भी कर दिया। हर व्यक्ति जागृत हो रहा है। हम सबको जो यह क्वालिटी लाइफ बच्चों के साथ बिताने का समय मिल रहा है। मेरी कई मित्र कोई बड़ी डाक्टर, बिजनेस वाली हैं जो जिन्दगी की तेज रफ्तार में भाग रही थी। अपने पोते-पोतियों के साथ फोटो शेयर करती हैं और कहती है कि हमें कोरोना का बहुत दु:ख है। इनकम बिल्कुल नहीं परन्तु जो परिवार के साथ अच्छा समय बिताने को मिल रहा। वो कभी  हमने सोचा ही नहीं था।
 कभी सोचा भी नहीं था, यह भी समझ आ रही है। शांति से जीवन व्यतीत करने के लिए कितनी कम  जरूरतें हैं। 
सो आओ सभी मिलकर अपनी जीवनशैली को बदल डालें और नए चैलेंज का सामना करते हुए जीना सीखें।

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