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अभिषेक बनर्जी को MP हाई कोर्ट से बड़ी राहत; मानहानि मामले में गिरफ्तारी वारंट पर दोबारा लगी रोक

06:24 PM Jun 25, 2026 IST | Rohit Singh
अभिषेक बनर्जी को mp हाई कोर्ट से बड़ी राहत  मानहानि मामले में गिरफ्तारी वारंट पर दोबारा लगी रोक
SOURCE : SOCIAL MEDIA

Abhishek Banerjee Defamation Case MP High Court : तृणमूल कांग्रेस TMC के सांसद अभिषेक बनर्जी को मानहानि के एक पुराने मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर दोबारा रोक लगा दी है।

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हाई कोर्ट के जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी की उस याचिका को फिर से बहाल कर दिया, जिसे पिछले दिनों वकीलों की अनुपस्थिति के चलते खारिज कर दिया गया था।

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दरअसल, बीते बुधवार यानी 17 जून 2026 को याचिकाकर्ता टीएमसी नेता या उनके वकीलों के कोर्ट में हाजिर न होने की वजह से अदालत ने गिरफ्तारी वारंट पर लगी अंतरिम रोक हटा ली थी और मामला बंद कर दिया था।

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न्यायालय ने तब अपने आदेश में कहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता अब इस कानूनी लड़ाई को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं, जिसके चलते रोक हटाते हुए याचिका खारिज की गई थी। हालांकि, ताजा फैसले के बाद अब अभिषेक बनर्जी की याचिका दोबारा कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बन गई है और उन्हें गिरफ्तारी से राहत मिल गई है।

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यह पूरा विवाद करीब पांच साल पुराना है। मध्य प्रदेश सरकार के मौजूदा मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बेटे और इंदौर के पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मानहानि का यह आपराधिक मुकदमा दायर किया था। आकाश विजयवर्गीय की ओर से दाखिल शिकायत में कहा गया था कि नवंबर 2020 में कोलकाता में आयोजित एक चुनावी जनसभा के दौरान टीएमसी सांसद बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से उन्हें 'गुंडा' कहकर संबोधित किया था।

आकाश विजयवर्गीय का तर्क था कि इस तरह के अमर्यादित बयान से समाज में उनकी और उनके परिवार की प्रतिष्ठा को भारी ठेस पहुंची और छवि खराब हुई। साल 2021 में इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए भोपाल की विशेष अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दे दिया था।

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निचली अदालत से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने इस आदेश को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में बनर्जी ने दलील दी थी कि वे देश के जिम्मेदार सांसद हैं, इसलिए उनके कानून से भागने या लापता होने की कोई भी आशंका नहीं है। उन्होंने अदालत से अपील की थी कि मामले की मेरिट पर फैसला होने तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए।

इस दलील को स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने पिछले साल 12 नवंबर 2025 को एक आदेश जारी कर बनर्जी के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट के अमल पर रोक लगा दी थी। लेकिन 17 जून 2026 को वकीलों के न पहुंचने से यह राहत हाथ से निकल गई थी, जिसे अब दोबारा कोर्ट ने बहाल कर दिया है। फिलहाल इस बहाली के बाद मामला फिर से सुनवाई के लिए तैयार है और टीएमसी सांसद को फौरी तौर पर कानूनी कवच मिल गया है।

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Rohit Singh

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रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।

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