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West Bengal Anti-Goonda Bill : विधानसभा में आज पेश हो रहा गैंगस्टर विरोधी सख्त कानून, 1972 के नियमों में बदलाव की तैयारी

03:03 PM Jun 29, 2026 IST | Rohit Singh
west bengal anti goonda bill   विधानसभा में आज पेश हो रहा गैंगस्टर विरोधी सख्त कानून  1972 के नियमों में बदलाव की तैयारी
West Bengal Anti-Goonda Bill (source : social media)

पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार राज्य में असामाजिक तत्वों और गैंगस्टरों के खिलाफ बेहद सख्त कानून लाने जा रही है। सोमवार को विधानसभा में एक अहम गैंगस्टर विरोधी विधेयक पेश किया जा रहा है। गुजरात और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर लाए जा रहे इस कानून का सीधा मकसद सूबे की कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करना और जनसुरक्षा को मजबूत बनाना है।

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1972 के कानून में बदलाव की तैयारी

इसके लिए साल 1972 के पुराने कानून में बड़ा संशोधन किया जा रहा है, जिसका नया नाम 'पश्चिम बंगाल जन सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक, 2026' होगा। इस नए ड्राफ्ट में समाज के लिए खतरा बनने वाले हिंसक अपराधियों को भी 'गुंडा' की श्रेणी में रखा गया है।

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अपराधियों की संपत्तियां होंगी जब्त: शुभेंदु अधिकारी

SOURCE : SOCIAL MEDIA

सत्ता संभालने के बाद से ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी लगातार अपराधियों पर नकेल कसने के संकेत दे रहे थे। बिल पेश होने से पहले उन्होंने साफ किया कि राज्य में गुंडागर्दी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे तत्वों की संपत्तियां भी जब्त की जाएंगी।

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अधिकारी ने जोर देकर कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस, ऋषि अरबिंदो और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की इस धरती पर किसी भी तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधि को पनपने नहीं दिया जाएगा। प्रशासन को उपद्रवियों से कड़ाई से निपटने के निर्देश दिए गए हैं।

किसे माना जाएगा 'असामाजिक तत्व' और 'गुंडा'?

West Bengal political News
West Bengal political News (SOURCE : SOCIAL MEDIA)

इस नए विधेयक में असामाजिक गतिविधियों को बहुत स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। कोई भी ऐसा काम जो सीधे या परोक्ष रूप से आम जनता में खौफ, असुरक्षा या दहशत पैदा करे, उसे इस दायरे में रखा जाएगा। इसके अलावा अवैध वसूली, किसी को उसकी जमीन या मकान से बेदखल करना, सरकारी या निजी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाना और बालू, रेत या जंगलों के अवैध खनन से सरकारी खजाने को चोट पहुंचाना भी इसी श्रेणी में आएगा।

वहीं, कानूनी तौर पर 'गुंडा' उसे समझा जाएगा जो किसी गिरोह या सिंडिकेट का हिस्सा बनकर लगातार इन वारदातों को अंजाम देता है, साजिश रचता है या अपराधियों की आर्थिक मदद करता है। नए नियमों के मुताबिक, भारतीय दंड संहिता, 2023 की धाराओं के तहत आने वाले गंभीर अपराधियों सहित आर्म्स एक्ट, ड्रग्स तस्करी (NDPS) और विस्फोटक अधिनियम के आरोपियों पर भी यह कानून सीधे लागू होगा।

कैसे काम करेगा कानून और क्या होगी सजा?

Bengal Law and Order
Bengal Law and Order (SOURCE : SOCIAL MEDIA)

नए नियमों के मुताबिक, किसी भी संदिग्ध की गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक (SP) या उनके समकक्ष अधिकारी की रिपोर्ट जरूरी होगी, जिसके आधार पर राज्य सरकार आदेश जारी करेगी। इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति पिछले 7 वर्षों में कम से कम एक बार अदालत से दोषी साबित हुआ हो या उस पर अलग-अलग मामलों में कम से कम 3 चार्जशीट दाखिल हों, तो उसे भी तुरंत हिरासत में लिया जा सकता है।

इस नए कानून के तहत दर्ज होने वाले सभी मामले पूरी तरह संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे। गिरफ्तार व्यक्ति के खिलाफ सबूतों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय एडवाइजरी बोर्ड काम करेगा।

जुर्माना समेत 3 साल तक की सजा

Protest damage compensation
Protest damage compensation (SOURCE : SOCIAL MEDIA)

सजा के प्रावधानों की बात करें तो आदेश का उल्लंघन करने वाले किसी भी दोषी को 3 साल तक की जेल और भारी जुर्माना हो सकता है। इसके साथ ही, ऐसे अपराधियों या संदिग्धों को अपने घर में पनाह देने या छिपाने वाले मददगारों को भी 2 साल तक की कैद भुगतनी होगी। इस कानून से बंगाल की जमीनी राजनीति और कानून-व्यवस्था में बड़े बदलाव की उम्मीद है।

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Rohit Singh

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रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।

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