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West Bengl SIR: 37 लाख से अधिक अपीलों के लटकने पर SC में सुनवाई, चुनाव आयोग ने पेश किया ब्योरा

चुनाव आयोग द्वारा कोर्ट में दाखिल हलफनामे के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ कुल 38,20,683 अपीलें मिली थीं। इनमें से 1,02,231 का फैसला हो चुका है, जबकि 37,18,452 अपीलें अभी भी प्रक्रिया में हैं। हालांकि, रिपोर्ट में नाम जोड़ने और हटाने वाली अपीलों का अलग-अलग आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।
05:15 PM Sep 18, 2026 IST | Rohit Singh
चुनाव आयोग द्वारा कोर्ट में दाखिल हलफनामे के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ कुल 38,20,683 अपीलें मिली थीं। इनमें से 1,02,231 का फैसला हो चुका है, जबकि 37,18,452 अपीलें अभी भी प्रक्रिया में हैं। हालांकि, रिपोर्ट में नाम जोड़ने और हटाने वाली अपीलों का अलग-अलग आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।
west bengl sir  37 लाख से अधिक अपीलों के लटकने पर sc में सुनवाई  चुनाव आयोग ने पेश किया ब्योरा

West Bengl SIR : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा विवाद गहराता जा रहा है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने या नए नाम जोड़े जाने से जुड़ी 37 लाख से अधिक अपीलें अब भी पेंडिंग हैं।

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सर्वोच्च अदालत द्वारा गठित विशेष न्यायाधिकरणों के सामने कुल 38.20 लाख से ज्यादा अपीलें दर्ज कराई गई थीं, जिनमें से अब तक केवल 1.02 लाख मामलों का ही निस्तारण हो पाया है। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कांग्रेस नेता प्रसेनजीत बोस की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें विधानसभा क्षेत्रवार दावों और आपत्तियों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई है।

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19 अपीलीय न्यायाधिकरणों में अटकीं लाखों फाइलें

चुनाव आयोग द्वारा कोर्ट में दाखिल हलफनामे के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ कुल 38,20,683 अपीलें मिली थीं। इनमें से 1,02,231 का फैसला हो चुका है, जबकि 37,18,452 अपीलें अभी भी प्रक्रिया में हैं। हालांकि, रिपोर्ट में नाम जोड़ने और हटाने वाली अपीलों का अलग-अलग आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कोलकाता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने पूर्व जजों की अगुवाई में 19 ट्रिब्यूनल गठित किए थे। इसके अलावा ओडिशा, झारखंड और बंगाल के करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को भी इन मुकदमों के जल्द निपटारे के लिए लगाया गया था, लेकिन इसके बावजूद पेंडेंसी का आंकड़ा काफी बड़ा बना हुआ है।

58 लाख नाम हटाए गए

याचिकाकर्ता प्रसेनजीत बोस का आरोप है कि गणना चरण के दौरान राज्य के 58 लाख से अधिक नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से बाहर कर दिए गए थे। दावे और आपत्तियां जमा करने के दौरान नाम जोड़ने के लिए प्रपत्र 6 और 6A के जरिए 9.64 लाख से ज्यादा आवेदन आए, जबकि नाम काटने के लिए प्रपत्र 7 के जरिए 99,000 से अधिक अर्जियां मिलीं। लेकिन जब 28 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट सामने आई, तो उसमें सिर्फ 1.82 लाख नाम ही जोड़े गए थे।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 17 दिसंबर 2025 से 7 अगस्त 2026 के बीच नए वोटर रजिस्ट्रेशन और हटाए गए नामों को दोबारा दर्ज कराने के लिए प्रपत्र 6 के तहत करीब 34.13 लाख नए आवेदन मिले हैं।

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Rohit Singh

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रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।

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