भारत में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस हम क्यों मनाते हैं? जानें इतिहास और महत्व

वर्षों तक अंग्रेजों का शासन सहने के बाद आखिरकार भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली। स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से 15 अगस्त 1947 की रात को कहा था कि आधी रात के समय, जब दुनिया सोती है तब भारत जगा है और उसे स्वतंत्रता और जीवन मिला है। 


बाद में, इस अवसर को मनाने के लिए दिल्ली के लाल किले के लाहौरी गेट के ऊपर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, जो बाद में नियमित रूप से बन गया। जबकि भारत इस साल अपना 73वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। हम आपको इस दिन के इतिहास के बारे में बताते हैं। 

स्वतंत्रता दिवस का इतिहास

लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा दिए गए जनादेश के मुताबिक, ब्रिटिश संसद को 30 जून, 1948 तक सत्ता हस्तांतरित करने का निर्देश किया गया था। हालांकि, लॉर्ड माउंटबेटन ने दावा किया था कि वह यह देखेंगे कि कोई खून-खराबे नहीं है, जिस तरह से सामने आई चीजों ने उन्हें गलत साबित कर दिया। बाद में उन्होंने यह कहकर इसे सही ठहराया, जहां भी कोलोनियल शासन समाप्त हुआ है, वहां खून-खराबा हुआ है। यही वह मूल्य है जो आप भुगतान करते हैं। 


4 जुलाई 1947 को माउंटबेटन के कहने के बाद, ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में भारतीय स्वतंत्रता विधेयक पेश किया गया था। इस बिल को जल्द ही पास कर दिया गया और 15 अगस्त 1947 को भारत में इसके पास होने के बाद ब्रिटिश शासन खत्म हो गया था। भारत और पाकिस्तान दो अलग-अलग देशों की स्‍थापना के लिए ब्रिटिश राष्ट्रमंडल ने अनुमति दी थी। 


हर साल इस दिन को पूरा देश हर्षो-उल्लास से मनाता है। स्कूल और कॉलेज इस दिन को विभिन्न स्किट्स, प्रतियोगिताओं और अन्य घटनाओं की व्यवस्‍था करते हैं और आज के दिन उन शहीदों को याद करते हैं जिन्होंने देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए अपनी कुरबानी दी थी। 

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