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स्पूतनिक-वी पर संदेह क्यों?

रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने ऐलान कर दिया है कि उनके वैज्ञानिकों ने कोरोना की वैक्सीन तैयार कर ली है। उन्होंने इस बात की जानकारी भी दी कि पहला कोरोना वैक्सीन उनकी बेटी को लगाया गया है
स्पूतनिक-वी पर संदेह क्यों?
रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने ऐलान कर दिया है कि उनके वैज्ञानिकों ने कोरोना की वैक्सीन तैयार कर ली है। उन्होंने इस बात की जानकारी भी दी कि पहला कोरोना वैक्सीन उनकी बेटी को लगाया गया है और वह पहले से बेहतर महसूस कर रही है। एक दिन में ही उसका बुखार कम हुआ है। यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है कि वैक्सीन की विश्वसनीयता सिद्ध करने के लिए किसी राष्ट्राध्यक्ष ने अपनी बेटी को पहला वैक्सीन लगाने की अनुमति दी। पुतिन और उनका परिवार काफी जांबाज है। इस संबंध में पुतिन की कई गाथाएं चर्चित हैं। अमेरिका, चीन, आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी लंदन, यूनिवर्सिटी आफ मेलबर्न, इस्राइल आदि देश भी कोरोना की कारगर दवा ईजाद करने में लगे हुए हैं। इनके द्वारा तैयार दवा के ट्रायल चल रहे हैं लेकिन वैक्सीन का इस्तेमाल करने में रूस ने बाजी मार ली। यद्यपि समूचा विश्व कोरोना की दवा का इंतजार कर रहा है उसे तो रूस द्वारा तैयार वैक्सीन का इस्तेमाल शुरू होने पर खुशी से झूम उठना चाहिए था लेकिन ऐसा हुआ नहीं। दरअसल जिस तेजी से रूस ने कोरोना वैक्सीन को हासिल करने का दावा किया है उसको देखते हुए वैज्ञानिक जगत में इसको लेकर चिंताएं भी जताई जा रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि  उसके पास अभी तक रूस द्वारा तैयार की गई कोरोना वैक्सीन के बारे में जानकारी नहीं है कि वो उनका मूल्यांकन करें। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहले ही रूस से आग्रह किया था कि वो कोरोना की दवा को लेकर अन्तर्राष्ट्रीय गाइड लाइन्स का पालन करे। रूसी वैक्सीन गामालेय रिसर्च इंस्टीट्यूट ने तैयार की है।
पुतिन बहुत दबंग हैं, वह भला विश्व स्वास्थ्य संगठन के आग्रह को कहां मानने वाले थे। कोरोना वायरस को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका पहले ही सवालों के घेरे में है। फिलहाल रूस ने अमेरिका, चीन और अन्य देशों को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि कई तरह की ​रिपोर्ट्स सामने आई हैं। कोई कह रहा है कि रूस ने आक्सफोर्ड का फार्मूला चुरा कर वैक्सीन तैयार की, कोई कुछ कह रहा है। रूस की सेचेनोव यूनिवर्सिटी ने हाल ही में दावा किया था कि उसने वैक्सीन का ट्रायल पूरा कर लिया है, यह इंसानों पर पूरी तरह सुरक्षित है। वैक्सीन के मुख्य शोधकर्ता का दावा है कि सभी हयूमन ट्रायल पूरे हो चुके हैं। अभी तक किसी बीमारी या वायरस के लिए इतनी जल्दी न दवाई बन सकी और न ही कोई वैक्सीन। 
वैश्विक शक्तियां भले ही रूसी वैक्सीन पर संदेह प्रकट करें लेकिन रूसी वैक्सीन की मांग 20 देशों ने की है। मांग करने वाले देशों में लैटिन अमेरिकी, मध्य पूर्व और कुछ एशियाई देश शामिल हैं। अब तक एक अरब डोज का आर्डर मिल चुका है।
अमेरिका और रूस के शीत युद्ध के बारे में हर कोई जानता है। रूस ने कोराेना वैक्सीन का नाम स्पूतनिक-वी रखा है। यह नाम भी अमेरिका को ​िचढ़ा रहा है। वर्ष 1957 में तत्कालीन सोवियत संघ (अब रूस) ने पहला उपग्रह स्पूतनिक-I लांच करके पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। सोवियत संघ उपग्रह लांच करने वाला पहला देश बना तो इसके बाद अमेरिका-रूस में ‘स्पेस वार’ शुरू हो गई थी। अंतरिक्ष में वर्चस्व स्थापित करने की होड़ आज भी जारी है लेकिन अब इसमें भारत भी शामिल है। अब ​विश्व स्वास्थ्य संगठन रूसी वैक्सीन के आंकड़ों की कड़ी जांच करेगा और यह जानना चाहेगा कि दावा कितना सही है। इसे कई कड़े परीक्षणों में गुजरना होगा और उसमें सफल होने के बाद ही डब्ल्यूएचओ इसे टीके के तौर पर मान्यता देगा। भारत भी अब नया प्रयोग करने जा रहा है। इस्राइल की मदद से पोस्ट कोविड रिकवरी क्लीनिक स्थापित करेगा और रोबोट उपकरण रोगियों की निगरानी करने में मदद देंगे। यह उपकरण दूरदराज के क्षेत्रों में भी फेफड़ों, हृदय और सांस लेने की समस्याओं वाले लोगों के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। इससे लोगों का जी​वन बचाया जा सकता है।
भारत में भी वैक्सीन विकसित करने की प्रक्रिया चल रही है और ट्रायल किए जा रहे हैं। एक सफल वैक्सीन का टीका सुरक्षित होना चाहिए, यह पहला मानक है। सैम्पल का आकार क्या है? यह कितना प्रभावकारी रहा है? भारत में अब कोरोना से मृत्यु दर दो फीसदी से नीचे आ गई है और रिकवरी रेट भी रोजाना बढ़ रहा है। भारतीयों ने जिस तरीके से योग और आहार का बेहतर उपयोग किया है उससे कोरोना वायरस के पराजित होने की सम्भावनाएं  दिखाई देने लगी हैं लेकिन हमें अभी काफी समय सतर्कता बरतनी होगी। रूसी वैक्सीन के भारत में इस्तेमाल की सम्भावनाएं इस बात पर निर्भर करेंगी कि यह सुरक्षित हो तो ही साथ ही वैक्सीन के कोई साइड इफैक्ट्स नहीं होने चाहिएं। अगर इससे मरीज में अच्छी प्रतिरोधक क्षमता आ जाती है तो फिर भारत के पास बड़े पैमाने पर इसके निर्माण की क्षमता है। अभी रूसी वैक्सीन पर बारीकी से जांच-पड़ताल करनी होगी।
रूस की वैक्सीन अगर सफल होती है तो फिर समूचे विश्व के लिए राहत भरी खबर होगी और इस बात की उम्मीद बढ़ जाएगी कि कोरोना वायरस पर काबू पा लिया जाएगा। अगर महामारी पर नियंत्रण पा लिया गया तो रूस के वैज्ञानिकों का यह दुनिया में बहुत बड़ा उपकार होगा। मानव जीवन की रक्षा करना ही सबसे बड़ा उपकार है। वैसे पुतिन करिश्माई नेता हैं और करिश्मे इसी संसार में होते हैं।
आदित्य नारायण चोपड़ा
Adityachopra@punjabkesari.com­
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