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सात अगस्त तक मनाया जाएगा विश्व स्तनपान सप्ताहः मंगल पांडेय

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य में एक अगस्त से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास तथा नवजात शिशु मृत्युदर में कमी लाने एवं कुपोषण से बचाने में स्तनपान की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
सात अगस्त तक मनाया जाएगा विश्व स्तनपान सप्ताहः मंगल पांडेय
पटना, (पंजाब केसरी): स्वास्थ्य मंत्री  मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य में एक अगस्त से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास तथा नवजात शिशु मृत्युदर में कमी लाने एवं कुपोषण से बचाने में स्तनपान की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसी उद्देश्य के तहत प्रति वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह मना महिलाओं को स्तनपान के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
श्री पांडेय ने कहा कि स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए आशा, एएनएम एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के द्वारा प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। ये सभी अभियान के दौरान अधिक से अधिक माताओं को शिशु के जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान प्रारंभ करने में मां की सहायता करने तथा गर्भवती व धात्री माताओं को छह माह तक केवल स्तनपान कराए जाने के महत्व के बारे में बताएंगे। इसके अलावा उनके साथ बैठक कर स्तनपान से होने वाले लाभ व स्तनपान के सही तरीके के संबंध में भी चर्चा करेंगे। राज्य के प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थानों में स्तनान कक्ष (ब्रेस्टफीडिंग कॉर्नर) का स्थापना किया जाएगा। यह स्तनपान कक्ष मुख्यतः ओपीडी के पास स्थापित किया गया है। उक्त स्तनपान कक्ष स्वास्थ्य संस्थान में स्थापित केएमसी (कंगारू मदर केयर) वार्ड के अतिरिक्त होगा। 
श्री पांडेय ने कहा कि अभियान को सफल बनाने के लिए कोविड-19 गाइड लाइन का पालन करते हुए जिला स्तरीय एवं प्रखंड स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसके अलावा प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान पर प्रचार-प्रसार के लिए बैनर लगाकर अभियान के बारे में बताया जा रहा है। स्तनपान सप्ताह के दौरान किसी एक दिन प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर स्वास्थ्य शिशु प्रतियोगिता का आयोजन होगा। इसमें माताओं को बच्चे के स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी जाएगी। जन्म के प्रथम एक घंटे में स्तनपान शुरू करने वाले नवजातों में मृत्यु की संभावना 20 प्रतिशत कम हो जाती है। प्रथम छह माह तक केवल स्तनपान करने वाले शिशुओं में डायरिया एवं निमोनिया से होने वाली मृत्यु की संभावना क्रमशः 11 एवं 15 गुणा कम जाती है। साथ ही इससे कई गैर संचारी रोगों से भी शिशु का बचाव होता है।
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