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Explainer: El-Nino Heatwave kya Hai? जानिए कैसे बदल देता है पूरी दुनिया का मौसम

03:43 PM Jun 29, 2026 IST | Amit Kumar
explainer  el nino heatwave kya hai  जानिए कैसे बदल देता है पूरी दुनिया का मौसम
El-Nino Heatwave kya Hai (credit S-M)

दुनिया भर में एक बार फिर एल नीनो (El Niño) हीटवेव को लेकर चिंता बढ़ गई है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी वजह से भारत समेत कई देशों में मौसम का संतुलन बिगड़ सकता है। इसका असर बारिश, गर्मी और सूखे पर साफ दिखाई देता है। भारत में अल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका रहती है। इसके साथ ही भीषण गर्मी और सूखे जैसी परिस्थितियां भी पैदा हो सकती हैं।

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दुनिया पर क्या पड़ेगा असर?

El-Nino Effect in Whole World (credit S-M)
El-Nino Effect in Whole World (credit S-M)

अमेरिका की राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय एजेंसी (NOAA) ने अल नीनो की स्थिति बनने की पुष्टि की है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्रभाव आने वाले महीनों में और मजबूत हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर देखने को मिलेगा। खासतौर पर खेती, जल संसाधन और खाद्य उत्पादन पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है, जो प्रशांत महासागर में होती है। इस दौरान महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है।

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समुद्र के तापमान में यह बदलाव केवल महासागर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। अल नीनो की वजह से कहीं भारी बारिश और बाढ़ आती है, तो कहीं सूखा और तेज गर्मी का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि इसे दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण जलवायु घटनाओं में से एक माना जाता है।

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एल नीनो हीटवेव का असर

El-Nino heatwave Effect (credit S-M)
El-Nino Heatwave Effect (credit S-M)

नॉर्मल दिनों में भूमध्य रेखा के पास चलने वाली व्यापारिक हवाएं (Trade Winds) समुद्र के गर्म पानी को दक्षिण अमेरिका से एशिया और ऑस्ट्रेलिया की ओर धकेलती हैं। लेकिन जब ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, तब गर्म पानी वापस दक्षिण अमेरिका के तटों की ओर जमा होने लगता है। भारत में अल नीनो का सबसे ज्यादा असर दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ता है। मानसून कमजोर होने से कई क्षेत्रों में कम बारिश होती है, जिससे खेती प्रभावित होती है।

पानी की कमी, फसलों का नुकसान और सूखे जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसके अलावा तापमान सामान्य से अधिक रहने के कारण हीटवेव यानी लू चलने की संभावना भी बढ़ जाती है। हालांकि हर बार एल नीनो हीटवेव का इफेक्ट एक जैसा नहीं होता, लेकिन इसके दौरान मौसम में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं।

पहले भी मचा चुका है तबाही

इतिहास में अल नीनो कई बार गंभीर असर छोड़ चुका है। माना जाता है कि 1876 से 1878 के बीच आए शक्तिशाली एल नीनो के कारण दुनिया के कई हिस्सों में सूखा, अकाल और भुखमरी फैली थी। इस दौरान करोड़ों लोगों की जान चली गई थी। इसलिए वैज्ञानिक लगातार इस पर नजर बनाए रखते हैं और समय-समय पर चेतावनी जारी करते हैं।

यह भी पढ़ें: France Heat Wave 2026 : जानिए फ्रांस में क्यों जानलेवा साबित हो रही है गर्मी? तापमान ने तोड़ा लगभग 150 साल पुराना रिकॉर्ड, 1000 अरितिक्त मौतें

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अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।

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