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बांग्लादेश में खसरे का कहर जारी, पांच और बच्चों की मौत; मृतकों की संख्या 854 पहुंची

10:50 PM Aug 05, 2026 IST | News Desk
बांग्लादेश में खसरे का कहर जारी  पांच और बच्चों की मौत  मृतकों की संख्या 854 पहुंची
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ढाका, 5 अगस्त (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरा (मीजल्स) का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। पिछले 24 घंटों में पांच और बच्चों की मौत के बाद इस बीमारी से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 854 हो गई है।

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स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने बुधवार सुबह तक के 24 घंटों के दौरान पांच नई मौतों की जानकारी दी। इन सभी मौतों को संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है।

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डीजीएचएस के आंकड़ों के मुताबिक, खसरे से अब तक 96 मौतों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 758 मौतें संदिग्ध मानी गई हैं।

पिछले 24 घंटों में खसरे के 959 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिसके बाद कुल संदिग्ध मामलों की संख्या बढ़कर 1,32,905 हो गई। इसी अवधि में 124 नए पुष्ट मामले दर्ज किए गए, जिससे कुल पुष्ट मामलों की संख्या 16,655 तक पहुंच गई।

इस बीच, मंगलवार को स्थानीय मीडिया में प्रकाशित दो मानवीय संगठनों की संयुक्त रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि खसरे से प्रभावित 10 में से कम से कम नौ परिवारों को इलाज का खर्च उठाने के लिए कर्ज लेना पड़ा, जबकि 10 में से छह परिवार अपनी पूरी बचत खर्च कर चुके हैं।

बांग्लादेश रेड क्रिसेंट सोसाइटी (बीडीआरसीएस) और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज (आईएफआरसी) ने देशभर के 12 सरकारी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में इलाज करा रहे 2,746 परिवारों के आंकड़ों का अध्ययन किया।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्येक परिवार ने खसरे के इलाज पर औसतन 16,000 बांग्लादेशी टका खर्च किए। कई अभिभावकों ने बताया कि बीमार बच्चों की देखभाल के लिए उन्हें काम से दूर रहना पड़ा, जिससे कुछ की आय बंद हो गई, जबकि कुछ लोग नौकरी भी गंवा बैठे।

सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्तुक हुसैन ने कहा कि कम आय वाले परिवारों पर खसरे के इलाज का आर्थिक बोझ "मेडिकल इम्पॉवरिशमेंट" (चिकित्सीय गरीबी) का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में मुफ्त प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का वादा किया था, लेकिन मौजूदा खसरा संकट के दौरान इसका असर देखने को नहीं मिला। उन्होंने कहा कि ऐसे संकट के समय ही लोगों को सरकारी सहायता की सबसे अधिक जरूरत होती है।

--आईएएनएस

डीएससी

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

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News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.

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