पाकिस्तान: हिंदू शाही काल का सदियों पुराना किला उपेक्षा और अतिक्रमण से हो रहा खंडहर
इस्लामाबाद, 3 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान में हिंदू शाही काल से जुड़े एक सदियों पुराने ऐतिहासिक किले की हालत लगातार खराब होती जा रही है। उपेक्षा, अतिक्रमण और पर्यावरणीय क्षति के कारण यह महत्वपूर्ण धरोहर धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रही है, जबकि यह पाकिस्तान के 1975 के प्राचीन स्मारक संरक्षण कानून के तहत संरक्षित है।
सऊदी अरब के अंग्रेजी दैनिक अरब न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद से करीब 40 किलोमीटर दूर सोआन नदी और पोठोहार क्षेत्र की पहाड़ियों से घिरे एक ऊबड़-खाबड़ पठारी इलाके में स्थित यह किला कभी भारतीय उपमहाद्वीप में आने-जाने वाले प्रमुख मार्गों की सुरक्षा के लिए रणनीतिक चौकी के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।
इतिहासकारों का मानना है कि किले की मूल संरचना हिंदू शाही काल की है, जबकि बाद में 10वीं से 15वीं शताब्दी के बीच गाखड़ जनजाति ने इसका विस्तार किया। इसे क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में से एक माना जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, किले की दीवारों और प्रवेश द्वारों पर झाड़ियां और वनस्पतियां उग आई हैं। खंडहरों के बीच पशु घूमते दिखाई देते हैं, जबकि आसपास प्लास्टिक कचरा और मानवीय गतिविधियों के निशान भी मौजूद हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने किले की बाहरी दीवारों के पास छोटी-छोटी खेती भी शुरू कर दी है।
पाकिस्तान के पुरातत्व विभाग के उपनिदेशक अब्दुल गफूर लोन ने बताया कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक प्रभावों के कारण संरचना लगातार कमजोर हो रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में सर्वेक्षण कार्य के दौरान केवल दीवारों पर उगी वनस्पतियों को हटाने में लगभग एक वर्ष का समय लग गया था।
लोन के अनुसार, किले की लगभग 20 से 30 प्रतिशत संरचना पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संरक्षण और मरम्मत कार्य में देरी जारी रही तो नुकसान और तेजी से बढ़ सकता है।
वर्तमान में किले के परिसर और आसपास करीब 25 परिवार निवास कर रहे हैं, जिनमें गाखड़ समुदाय के लोग भी शामिल हैं। उनका दावा है कि उनका संबंध उस ऐतिहासिक जनजाति से है, जिसने कभी इस किले का विस्तार किया था।
27 वर्षीय स्थानीय निवासी सुब्हान कियानी ने कहा कि यह किला उनकी पहचान और विरासत का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इलाके में न तो स्कूल है, न अस्पताल और न ही बेहतर सड़क सुविधा। सोआन नदी पर स्थायी पुल नहीं होने के कारण लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि पुनरुद्धार और संरक्षण कार्य जल्द शुरू नहीं किया गया, तो क्षेत्र की यह महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर हमेशा के लिए नष्ट हो सकती है।
--आईएएनएस
डीएससी
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

Join Channel