पाकिस्तान: हिंदू युवती के कथित अपहरण, धर्म परिवर्तन और शादी के मामले ने बढ़ाई चिंताएं
नई दिल्ली, 2 सितंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित उत्पीड़न को लेकर चिंताओं के बीच एक 21 वर्षीय हिंदू युवती रीता के कथित अपहरण, धर्म परिवर्तन और शादी का मामला फिर चर्चा में आ गया है।
पंजाब पुलिस द्वारा युवती को बरामद किए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना सिंध प्रांत के संगहार जिले की खिपरो तहसील में हुई। राणा राजपूत कॉलोनी की रहने वाली रीता 24 अगस्त को अपने घर से लापता हो गई थीं।
रीता के भाई रविशंकर ने शिकायत में आरोप लगाया कि कुछ अज्ञात लोग उसे घर से अपने साथ ले गए।
परिवार ने पुलिस को बताया कि सीसीटीवी फुटेज में रीता कुछ लोगों के साथ घर से बाहर जाती हुई दिखाई दी थी। बाद में उसे कथित रूप से पंजाब प्रांत के गुजरांवाला ले जाया गया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि रीता पर इस्लाम धर्म अपनाने और नजीर हुसैन नामक व्यक्ति से शादी करने का दबाव डाला गया। रिपोर्ट के अनुसार, नजीर हुसैन पहले से विवाहित है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस घटना ने पाकिस्तान में हिंदू और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा, अधिकारों तथा कथित अपहरण, दबाव, धर्म परिवर्तन और जबरन विवाह जैसे मामलों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
पंजाब पुलिस द्वारा बरामद किए जाने के बाद रीता को सोमवार को एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि रीता अपने माता-पिता के पास वापस नहीं जाना चाहती और उसे सरकारी महिला आश्रय गृह दार-उल-अमान भेजा जाए।
हालांकि, रीता के वकीलों असद जमाल और खेता राम ने इसका विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि रीता अपने भाई के साथ घर लौटना चाहती है, जो सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद था।
इसके बाद मजिस्ट्रेट ने रीता से शपथ लेकर बयान दर्ज कराने को कहा। रिपोर्ट के अनुसार, रीता ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि वह अपनी इच्छा से अपने माता-पिता के पास लौटना चाहती है।
महत्वपूर्ण फैसले में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने रीता को उसके परिवार के साथ फिर से रहने की अनुमति दे दी। अदालत ने रीता को उसके भाई की सुरक्षित अभिरक्षा में सौंपते हुए निर्देश दिया कि उसे सुरक्षित तरीके से सिंध प्रांत के संगहार जिले स्थित उसके घर पहुंचाया जाए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मामला पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से उठ रही चिंताओं को फिर सामने लाता है। मानवाधिकार संगठन लगातार अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों और महिलाओं के कथित अपहरण, दबाव, धर्म परिवर्तन और विवाह से जुड़े मामलों पर चिंता जताते रहे हैं।
--आईएएनएस
एएमटी/एबीएम
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