सिंधु जल संधि से नहीं, खराब प्रबंधन और भूजल दोहन की वजह से जल संकट से जूझ रहा पाकिस्तान: रिपोर्ट
इस्लामाबाद, 8 जुलाई (आईएएनएस)। पाकिस्तान में पानी का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। लाहौर और पंजाब प्रांत के कई अन्य इलाकों में पानी की कमी और गंभीर होती जा रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, अपनी आंतरिक समस्याओं और जरूरत से ज्यादा भूजल निकालने जैसी वजहों पर ध्यान देने के बजाय इस्लामाबाद लगातार भारत को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहा है।
यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की सिंचाई व्यवस्था दुनिया की सबसे खराब व्यवस्थाओं में से एक है। नहरों में रिसाव और पानी की बर्बादी के कारण बड़ी मात्रा में पानी बेकार चला जाता है।
रिपोर्ट में इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (आईडब्ल्यूएमआई) के 2024-2026 के आकलनों का हवाला देते हुए बताया गया कि पाकिस्तान के कुल मीठे पानी का करीब 95 प्रतिशत हिस्सा खेती में इस्तेमाल होता है। वहीं, सिंचाई की खराब व्यवस्था और खेतों तक पानी पहुंचाने के पुराने तरीकों की वजह से लगभग 60 प्रतिशत सिंचाई का पानी बर्बाद हो जाता है।
हाल ही में पाकिस्तान ने इस्लामाबाद के जिन्ना कन्वेंशन सेंटर में एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया, जिसका विषय था — 'सिंधु जल संधि: शांति और क्षेत्रीय स्थिरता का एक साधन।'
यूरेशियन टाइम्स ने कहा कि इस सेमिनार का विषय इस तरह बनाया गया था ताकि सिंधु जल संधि के मुद्दे को एक बड़े क्षेत्रीय सुरक्षा संकट के रूप में पेश किया जा सके और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, यह उसी तरह की रणनीति है जैसी पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर मुद्दे को 'परमाणु खतरे वाले क्षेत्र' के रूप में पेश करके अपनाता रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान अक्सर सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को सीमा पार नदियों के सहयोग का एक सफल उदाहरण बताता है, लेकिन 1960 से अब तक इसका जारी रहना काफी हद तक इसलिए संभव हुआ क्योंकि ऊपरी क्षेत्र में स्थित देश भारत ने लगातार 'सद्भावना और उदारता' दिखाई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अगर पाकिस्तान ऊपरी क्षेत्र में स्थित देश होता, तो यह मानना मुश्किल है कि वह शुरुआत से ही अपने नियंत्रण वाले पानी के स्रोतों का इस्तेमाल भारत पर दबाव बनाने के लिए नहीं करता।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने कई बार सिंधु जल संधि की भावना का उल्लंघन किया। इसमें 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध, 1999 का कारगिल संघर्ष और इसके अलावा सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देना शामिल है।
रिपोर्ट में संसद हमले (दिसंबर 2001), मुंबई आतंकी हमले (नवंबर 2008), पुलवामा हमले (फरवरी 2019) और कई अन्य आतंकी घटनाओं का भी जिक्र किया गया। इसमें अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले को भी शामिल किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, पहलगाम हमले के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को फिलहाल रोक दिया। भारत ने अब साफ कर दिया है कि भविष्य में इस संधि पर सहयोग पाकिस्तान के सीमा पार आतंकवाद खत्म करने के कदमों पर निर्भर करेगा।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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