ट्रंप ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन की सराहना की, एफ-35 कार्यक्रम में वापसी के संकेत
अंकारा, 8 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को संकेत दिया कि उनका प्रशासन तुर्की को फिर से एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट कार्यक्रम में शामिल करने पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने हाल के मध्य-पूर्व संघर्ष से तुर्की को दूर रखकर एक अहम भूमिका निभाई है। ट्रंप ने अमेरिका और तुर्की के रिश्तों को भी बेहद मजबूत बताया।
अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा कि एफ-35 लड़ाकू विमानों को लेकर बातचीत जारी है और उनका झुकाव तुर्की को इस कार्यक्रम में वापस लाने की तरफ है।
ट्रंप ने कहा, "वे एफ-35 विमान के बारे में बात कर रहे हैं। यह सबसे बेहतरीन विमान है और हर कोई इसे चाहता है। हमें फैसला करना होगा कि हम इसे किसे देते हैं।"
उन्होंने कहा कि मेरी सोच इस दिशा में है क्योंकि एर्दोगन ने खुद को उस युद्ध से दूर रखा। वह बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े प्रशंसक नहीं हैं और न ही वह इजरायल के बहुत बड़े समर्थक हैं। लेकिन उन्होंने उस युद्ध में हिस्सा नहीं लिया। वह आसानी से इसमें शामिल हो सकते थे, लेकिन मेरे कहने पर उन्होंने ऐसा नहीं किया।"
ट्रंप ने एर्दोगन को 'बहुत अच्छा सहयोगी' बताया और अमेरिका-तुर्की के बीच सहयोग की तारीफ की। ट्रंप ने कहा कि तुर्की एक बड़ा देश है और उसकी सेना बहुत ताकतवर है। उन्होंने कहा कि यह नाटो का दूसरा सबसे शक्तिशाली देश है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनके दोबारा सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के रिश्ते काफी बेहतर हुए हैं।
ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि मेरे पहले कार्यकाल में भी मेरे बहुत अच्छे रिश्ते थे।
उन्होंने कहा कि जब स्लीपी जो बाइडेन सत्ता में आए, तो बहुत सी चीजें खराब हो गईं। मुझे लगता है कि तुर्की भी उन देशों में से एक था, लेकिन पांच नवंबर को हुए चुनाव के बाद यह बदल गया। अब हमारे सबसे अच्छे संबंंधों में से तुर्की भी शामिल है।
इससे पहले दिन में नाटो महासचिव मार्क रूटे के साथ मुलाकात के दौरान भी ट्रंप ने एर्दोगन की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि इजरायल के साथ तनाव के बावजूद तुर्की के नेता ने हाल के संघर्ष के दौरान संयम दिखाया।
अमेरिका ने 2019 में तुर्की को एफ-35 कार्यक्रम से बाहर कर दिया था। इसकी वजह थी कि तुर्की ने रूस से बने एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदे थे। अमेरिका का कहना था कि एफ-35 जैसे संवेदनशील तकनीक वाले विमान और एस-400 को एक साथ इस्तेमाल करने से विमान की सुरक्षा और तकनीक को खतरा हो सकता है। इसके बाद अमेरिका ने तुर्की पर सीएएटीएसए कानून के तहत प्रतिबंध भी लगाए थे।
तब से तुर्की लगातार एफ-35 कार्यक्रम में वापस शामिल होने की मांग करता रहा है। तुर्की का कहना है कि उसे इस कार्यक्रम से हटाना सही फैसला नहीं था।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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