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अमेरिकी आरोप-पत्र से साबित हुआ निज्जर हत्याकांड में नहीं भारतीय अधिकारियों का हाथ

03:55 PM Jul 08, 2026 IST | News Desk
अमेरिकी आरोप पत्र से साबित हुआ निज्जर हत्याकांड में नहीं भारतीय अधिकारियों का हाथ
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नई दिल्ली, 8 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके एक सहयोगी के खिलाफ आरोप तय किए हैं। इस आरोप से साबित होता है कि अलगाववादी की हत्या भारत सरकार की नहीं बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक सिंडिकेट की कारस्तानी थी।

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33 वर्षीय लॉरेंस बिश्नोई "बिश्नोई गैंग" का प्रमुख है। उसे भारत और विदेशों में कई चर्चित अपराधों के लिए जाना जाता है। फिलहाल वो जेल में बंद है।

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इससे पहले लगाए गए आरोपों ने विशेष रूप से कनाडा और भारत के बीच राजनयिक संबंधों को गंभीर संकट में डाल दिया था। निज्जर कनाडाई नागरिक और सिख अलगाववादी नेता था, जो खालिस्तान के निर्माण के अभियान से जुड़ा था। भारत ने उसे आतंकवादी घोषित किया था और उस पर हिंसक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया था।

18 जून 2023 को वैंकूवर के पास 'सरे' शहर में एक गुरुद्वारे के बाहर उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। ये हत्या कनाडा-भारत संबंधों में तनाव का बड़ा कारण बन गई।

उस समय के कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा था कि कनाडाई अधिकारी ऐसे "विश्वसनीय आरोपों" की सक्रिय रूप से जांच कर रहे हैं, जिनमें हत्या को भारतीय सरकारी एजेंटों से जोड़ा जा रहा है।

भारत ने इन आरोपों को "बेतुका" बताते हुए खारिज कर दिया था। हालांकि, इन आरोपों के कारण दोनों देशों के बीच बड़ा राजनयिक संकट पैदा हुआ, जिसमें राजनयिकों को निष्कासित करना और द्विपक्षीय संबंधों को रोकना शामिल था।

अब अमेरिका ने एक आरोप-पत्र सार्वजनिक किया है, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ पर निज्जर की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है।

आरोपों के अनुसार, बिश्नोई ने भारत की जेल में रहकर हत्याकांड को लेकर निर्देश दिया, जबकि बराड़ ने उत्तरी अमेरिका में इसकी गतिविधियों की निगरानी की। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस आरोप-पत्र में निज्जर की हत्या में भारत सरकार की किसी भूमिका का उल्लेख नहीं किया गया है।

बुधवार को भारतीय समयानुसार प्रसारित कनाडाई ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (सीबीसी न्यूज) की रिपोर्ट के अनुसार, रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) की उप आयुक्त लिसा मोरलैंड ने एक साक्षात्कार में कहा, "जांच में भारतीय अधिकारियों की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला।"

रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सरकार ने जांच में सहयोग किया।

कई अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स ने भी कहा कि लगाए गए आरोप संगठित अपराध नेटवर्क पर केंद्रित हैं, जिससे भारत सरकार की कथित संलिप्तता के पहले के कनाडाई आरोप कमजोर पड़ते हैं।

सीएनएन ने बुधवार को रिपोर्ट किया कि लॉस एंजिलिस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी अधिकारियों (जिनमें फर्स्ट असिस्टेंट यूएस अटॉर्नी बिल एस्ली भी शामिल थे) ने यह आरोप नहीं लगाया कि भारतीय सरकार हत्या में शामिल थी या उसे इसकी जानकारी थी।

कनाडा के सार्वजनिक बयानों के कारण भारत को काफी हद तक दोषी ठहराया गया था, जिनमें सरकारी संलिप्तता का संदेह जताया गया था। भारत ने इन आरोपों का कड़ा खंडन किया था।

अब यह मामला निज्जर की हत्या को किसी राज्य प्रायोजित कार्रवाई के बजाय एक अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध अभियान के रूप में पेश करता है।

कनाडा के समाचार पत्र द ग्लोब एंड मेल ने बुधवार को हत्या और उसके बाद पैदा हुए विवाद को "भू-राजनीतिक संकट का कारण" बताया। अखबार ने कहा कि बिश्नोई और उसके सहयोगियों के खिलाफ अमेरिकी अभियोग में इस दावे का कोई उल्लेख नहीं है कि भारतीय सरकार के एजेंट हत्या के पीछे थे।

पिछले साल अक्टूबर में कनाडा के टोरंटो सन अखबार ने लिखा था कि वर्षों के अविश्वास और आरोप-प्रत्यारोप के बाद कनाडा और भारत के बीच तनावपूर्ण संबंध अब सुधरने लगे हैं।

अखबार ने कहा कि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा भारतीय प्रधानमंत्री को बातचीत के लिए आमंत्रित करना इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के संबंध सामान्य हो रहे हैं। यह टिप्पणी कार्नी के पूर्ववर्ती कार्यकाल में खराब हुए संबंधों के संदर्भ में की गई थी।

रिपोर्ट में कहा गया, "दो साल पहले कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा संसद में सार्वजनिक रूप से यह आरोप लगाने के बाद भारत के साथ संबंध खराब हो गए थे कि मोदी सरकार ने जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया के एक गुरुद्वारे की पार्किंग में प्रमुख सिख अलगाववादी निज्जर की हत्या करवाई।"

रिपोर्ट में पूर्व कनाडाई राजनयिक और मैकडोनाल्ड-लॉरियर इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो एलन केसल के हवाले से कहा गया कि कार्नी द्वारा भारत के साथ संबंध सुधारने की पहल और अल्बर्टा में जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित करने के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार शुरू हुआ।

केसल ने कहा, "यह स्पष्ट संकेत था कि कनाडा फिर से बातचीत की दिशा में लौट रहा है और अलगाव की नीति नहीं अपना रहा।"

सितंबर 2023 में ट्रूडो ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि निज्जर की हत्या में भारतीय सरकार की संलिप्तता के "विश्वसनीय सबूत" हैं।

भारत ने तुरंत इन आरोपों को "बेतुका" बताते हुए खारिज कर दिया था। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के वरिष्ठ राजनयिकों को निष्कासित किया, व्यापार वार्ताएं रोक दीं और मंत्रिस्तरीय संवाद निलंबित कर दिए।

कनाडा में राजनीतिक बदलाव और मई 2025 में मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद ओटावा ने भारत के प्रति अपनी नीति पर दोबारा विचार किया।

कार्नी ने पिछले साल अल्बर्टा में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की और संबंधों को फिर से पटरी पर लाने पर सहमति जताई। इसके बाद दोनों देशों ने अपने-अपने उच्चायुक्तों की नियुक्ति बहाल की, वीजा सेवाएं फिर शुरू हुईं और व्यापार, ऊर्जा, पर्यावरण तथा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मंत्रिस्तरीय बातचीत दोबारा शुरू हुई। साथ ही दोनों देशों के सुरक्षा अधिकारियों ने साझा चिंताओं को लेकर सूचनाओं का आदान-प्रदान शुरू किया।

--आईएएनएस

केआर/

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

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