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पाकिस्तान में अल्पसंख्यक ईसाई दंपति को जिंदा ईंट-भट्ठे में फेंकने वालों को सुप्रीम कोर्ट ने किया बरी

05:49 PM Jul 19, 2026 IST | News Desk
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक ईसाई दंपति को जिंदा ईंट भट्ठे में फेंकने वालों को सुप्रीम कोर्ट ने किया बरी
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इस्लामाबाद, 19 जुलाई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने एक ईसाई आदमी शहजाद मसीह (26) और उसकी गर्भवती पत्नी शमा बीबी (24) की हत्या के दोषी तीन लोगों की सजा रद्द कर दी। मामला 2014 का है, जब दंपत्ति को ईंट के भट्टे में फेंकने के बाद जलाकर मार दिया गया था।

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पीजे मीडिया के अनुसार, यह घटना 4 नवंबर, 2014 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कसूर जिले में हुई थी। मसीह और बीबी एक लोकल ईंट फैक्ट्री में मजदूरी का काम करते थे, उन पर कुरान के पन्नों की बेअदबी करने का झूठा आरोप लगाया गया। ईंट भट्टे के मालिक ने पैसे के झगड़े की वजह से दंपत्ति को भागने से रोक दिया था।

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एक स्थानीय इस्लामिक नमाज पढ़ाने वाले ने मस्जिद के लाउडस्पीकर से भीड़ को उनके खिलाफ भड़काया। इसके बाद 1,000 से ज्यादा लोगों की भीड़ उस जगह पर जमा हो गई। उन्होंने दंपत्ति को बुरी तरह टॉर्चर किया और पीटा, फिर उन्हें इंडस्ट्रियल ईंट भट्टे की आग में फेंक दिया।

हैरानी की बात यह है कि 12 साल बाद पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने दंपत्ति की हत्या के लिए दोषी पाए गए तीन लोगों को बरी कर दिया है। पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में एक कदम आगे बढ़ते हुए पंजाब प्रांतीय सरकार की उस अपील को भी खारिज कर दिया, जिसमें युवा दंपति के खिलाफ हुई बर्बर हिंसा में कथित रूप से शामिल 102 आरोपियों को बरी किए जाने को चुनौती दी गई थी। इसके साथ ही अब इस दंपति की हत्या के मामले में कोई भी दोषी करार नहीं बचा है।

वर्ष 2014 में हुई इस ऑनर किलिंग के बाद आतंकवाद निरोधी अदालत ने कई आरोपियों को दोषी ठहराया था। अदालत ने पांच लोगों को मौत की सजा सुनाई थी जबकि आठ अन्य को दो-दो वर्ष के कारावास की सजा दी गई थी।

हालांकि, समय के साथ उच्च अदालतों ने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए अधिकांश दोषसिद्धियों को रद्द कर दिया। 2018 में एक अदालत ने 20 अन्य आरोपियों को भी बरी कर दिया था।

इसके बाद 10 जुलाई को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा पाए अंतिम तीन दोषियों को भी बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर था और स्थानीय पुलिस द्वारा साक्ष्य पेश करने की प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं।

कैथोलिक चैरिटी संस्था एड टू द चर्च इन नीड (एसीएन) को दिए इंटरव्यू में, बिशप सैमसन शुकार्डिन (पाकिस्तान के कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस के प्रेसिडेंट) और इंद्रियास रहमत (फैसलाबाद के बिशप) ने कहा कि मसीह और बीबी की हत्या के आरोप से बरी हुए लोगों को रिहा करना उसी पैटर्न का हिस्सा है। पाकिस्तान में ईसाइयों और दूसरे अल्पसंख्यकों को लक्षित हिंसा के बाद नियमित तौर पर इंसाफ नहीं मिलता है।

--आईएएनएस

केके/पीएम

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

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News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.

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