भारतीय भाषाई परंपराओं के संरक्षण का दूसरा नाम है ILNA
देश के लोकतंत्र में चौथे स्तम्भ के रूप में प्रेस की पहचान का लोहा देशवासी मानते हैं। इस कड़ी में भारतीय भाषा समाचार पत्र यानि ‘इलना’ के योगदान को भी भुलाया नहीं जा सकता। अगर हम अतीत में झांकें तो पाते हैं कि भारतीय भाषाई समाचार पत्र संघ का इतिहास बहुत ही गौरवपूर्ण रहा है। मेरा यह मानना है कि भारत जैसे बहुभाषी देश में क्षेत्रीय भाषाओं में प्रकाशित समाचार पत्र सामाजिक, सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक संरचना की आधारशिला रहे हैं। इसी क्षेत्रीय प्रेस की आवाज़ को एकजुट करने और उनके हितों की रक्षा के उद्देश्य से भारतीय भाषाई समाचार पत्र संघ (Indian Languages Newspapers Association – ILNA) की स्थापना की गई। समय के साथ ‘इलना’ न केवल एक प्रतिनिधि संस्था बनकर उभरा, बल्कि भाषा-आधारित पत्रकारिता की मजबूती का भी प्रतीक बना। जो कि समय की मांग भी रहा है। क्षेत्रीय तथा स्थानीय समाचार पत्रों की मजबूती के लिए 1940 के ‘इलना’ की स्थापना की गई थी। आज ‘इलना’ की सदस्यता का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और यह मूल उद्देश्य संगठन ही शक्ति है, को अपने आप में समर्पित किए हुए है।
जिस दौर में ‘इलना’ की स्थापना हुई, उस समय भारत में पत्रकारिता तेजी से विस्तार कर रही थी। अंग्रेज़ी मीडिया को सरकारी विज्ञापन, संसाधनों और नीतिगत लाभों में विशेष प्राथमिकता मिलती थी, जबकि क्षेत्रीय भाषाओं के समाचार पत्र कई चुनौतियों से जूझ रहे थे। इसी असमानता को दूर करने और भारतीय भाषाओं में प्रकाशित समाचार पत्रों की सामूहिक शक्ति को संगठित करने के उद्देश्य से ‘इलना’ का गठन हुआ। सच बात तो यह है कि हमारी ‘इलना’ ने शुरुआत से ही यह सुनिश्चित किया कि हिंदी, पंजाबी, बंगाली, तमिल, मलयालम, मराठी, गुजराती, तेलुगु और अन्य भारतीय भाषाओं के समाचार पत्रों की आवाज़ राष्ट्रीय स्तर पर सुनी जाए। ‘इलना’ ने विभिन्न राज्यों के प्रकाशकों को एक साझा मंच प्रदान किया, जहां वे समस्याओं पर चर्चा कर सकें और समाधान तलाश सकें। मेरा मानना है कि आज चुनौतियों भरे समय में इलना का महत्व और भी ज्यादा है क्योंकि इसके केन्द्र बिन्दु स्वयं अपनी कहानी दर्शा रहे हैं। जिनमें शामिल हैं- भारतीय भाषाई पत्रकारिता को मजबूती प्रदान करना। जिसके तहत भारत की अधिकांश आबादी अपनी मातृभाषा में समाचार पढ़ती है। क्षेत्रीय अखबार गांव-कस्बों तक पहुंचते हैं और आम लोगों की आवाज़ बनते हैं। ‘इलना’ इन प्रकाशनों के महत्व को आगे बढ़ाते हुए यह सुनिश्चित करता है कि भाषाई पत्रकारिता मज़बूती से आगे बढ़ती रहे। ‘इलना’ का नीति-निर्माताओं तक क्षेत्रीय प्रेस की आवाज़ पहुंचाना भी बड़ा मकसद है। ‘इलना’ लंबे समय से सरकार, विज्ञापन एजेंसियों, और मीडिया नीति निर्माताओं के समक्ष भाषाई समाचार पत्रों के हितों को रखता रहा है, जैसे-सरकारी विज्ञापनों का न्यायपूर्ण वितरण, न्यूज़प्रिंट की उपलब्धता, छोटे–मध्यम प्रकाशनों को उचित अवसर और विनियमों और मानकों पर मार्गदर्शन इत्यादि। इसी कड़ी में इलना क्षेत्रीय प्रेस के अधिकारों और आवश्यकताओं का प्रभावी प्रतिनिधित्व करता है। वहीं छोटे और मध्यम प्रकाशनों का सहयोग भी सिम्मलित है। सब जानते हैं िक देश के कई भाषाई समाचार पत्र जिला-स्तर या छोटे शहरों से प्रकाशित होते हैं। संसाधनों की सीमाओं के बावजूद वे स्थानीय पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ‘इलना’ प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी, प्रिंट और प्री-प्रेस सुधारों, तथा व्यावसायिक मार्गदर्शन के माध्यम से इन प्रकाशनों को आगे बढ़ने में सहायता करता है। इसके साथ ही भारतीय मीडिया में विविधता की रक्षा भी जरूरी है। भारत की शक्ति उसकी भाषाई और सांस्कृतिक विविधता में है। ‘इलना’ इस विविधता को सुरक्षित रखते हुए सुनिश्चित करता है कि अलग-अलग क्षेत्रों और भाषाओं की आवाजें राष्ट्रीय विमर्श में बराबर शामिल हों। यह लोकतंत्र को अधिक समावेशी और मजबूत बनाता है। यह भी आवश्यक है कि प्रकाशकों के बीच सहयोग और संवाद बना रहना चाहिए।
यह भी तथ्य है ‘इलना’ अलग-अलग राज्यों और भाषाओं के प्रकाशकों को एक साझा मंच प्रदान करता है। यहां वे उद्योग की चुनौतियों—जैसे लागत, विज्ञापन, वितरण, डिजिटल संक्रमण—पर चर्चा कर सामूहिक समाधान खोज सकते हैं। इस प्रकार संघ पूरा उद्योग मजबूत करने की दिशा में कार्य करता है। कुल मिलाकर ‘इलना’ द्वारा प्रदत्त एक जिम्मेदारी के तहत मैं मीडिया उत्थान के लिए कृत संकल्प हूं। भारतीय भाषाई समाचार पत्र संघ (इलना) ने वर्षों से देश के क्षेत्रीय मीडिया को एक आवाज़ देने, उनके हितों की रक्षा करने और पत्रकारिता को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। लोकतंत्र की मजबूती के लिए भाषाई समाचार पत्रों का सशक्त और स्वतंत्र रहना बेहद आवश्यक है, और ‘इलना’ इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाता रहा है। आज जब मीडिया उद्योग डिजिटल परिवर्तन, बढ़ती लागत और बदलते उपभोक्ता व्यवहार जैसी नई चुनौतियों का सामना कर रहा है, तो ऐसे में ‘इलना’ की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। यह संघ न केवल भाषाई प्रेस की परंपरा को संरक्षित करता है, बल्कि उसे भविष्य के लिए तैयार भी करता है।

Join Channel