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लॉकडाउन : असम, पश्चिम बंगाल में चाय उद्योग को हुआ 2,100 करोड़ रुपये के राजस्व का नुक्सान

भारतीय चाय संघ ने वाणिज्य मंत्रालय और दोनों प्रदेशों की राज्य सरकारों से चाय उत्पादकों के लिए आर्थिक राहत पैकेज की मांग की है। इसमें ब्याज पर छूट, कार्यशील पूंजी की सीमा बढ़ाना और बिजली बिल के भुगतान और भविष्य निधि के बकायों को चुकाने पर राहत शामिल है।
लॉकडाउन : असम, पश्चिम बंगाल में चाय उद्योग को हुआ 2,100 करोड़ रुपये के राजस्व का नुक्सान
भारतीय चाय संघ (आईटीए) ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान मार्च-मई अवधि में असम और पश्चिम बंगाल में चाय कारोबार को 2,100 करोड़ रुपये के राजस्व का नुक्सान होने का अनुमान है। संघ के मुताबिक इन दोनों राज्यों में इस दौरान चाय के उत्पादन में 14 करोड़ किलोग्राम का घाटा होने का अनुमान है। पिछले साल की नीलामी की कीमतों के आधार पर चाय उद्योग को इससे 2,100 करोड़ रुपये के राजस्व के नुकसान का अनुमान लगाया है। 

संघ के अधिकारी ने कहा, ‘‘ कोविड-19 लॉकडाउन की वजह से चाय उद्योग पर बहुत वित्तीय दबाव पड़ा है।’’ उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में चाय उद्योग की उत्पादन लागत बढ़ी है लेकिन उसके अनुपात में कीमत नहीं बढ़ी। लॉकडाउन की वजह से असम और बंगाल में उत्पादन मार्च और अप्रैल में करीब 65 प्रतिशत और मई में 50 प्रतिशत गिरा है। अधिकारी ने कहा कि सामान्य से कम संख्या में लोगों के चाय बागानों में काम करने से परिचालन संबंधी दिक्कतें भी पेश आ रही हैं। 

भारतीय चाय संघ ने वाणिज्य मंत्रालय और दोनों प्रदेशों की राज्य सरकारों से चाय उत्पादकों के लिए आर्थिक राहत पैकेज की मांग की है। इसमें ब्याज पर छूट, कार्यशील पूंजी की सीमा बढ़ाना और बिजली बिल के भुगतान और भविष्य निधि के बकायों को चुकाने पर राहत शामिल है। निर्यात के पक्ष पर संघ ने कहा कि ईरान, रूस, संयुक्त अरब अमीरात और यूरोप जैसे देशों से असम में दूसरे दौर की तुड़ाई वाली चाय की काफी मांग है।
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