W3Schools
For the best experience, open
https://m.punjabkesari.com
on your mobile browser.
Advertisement

मोहन भागवत का संदेश

04:30 AM Aug 30, 2025 IST | Aditya Chopra
मोहन भागवत का संदेश
पंजाब केसरी के डायरेक्टर आदित्य नारायण चोपड़ा

दुनिया के सबसे विशाल संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक श्री मोहन भागवत जब भी सम्बोधन करते हैं तो उनके शब्दों के गहरे अर्थ होते हैं। उनके संबोधन की सराहना और आलोचना दोनों ही होती हैं लेकिन उनका संदेश इतना स्पष्ट और दो टूक होता है कि जन मानस उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल पूरे होने के अवसर पर दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम में संघ प्रमुख ने संगठन के उद्देश्यों, विचारों और सामाजिक योगदान को सबके सामने रखा। उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने काशी-मथुरा आंदोलन, राजनीतिज्ञों के रिटायरमेंट, नई शिक्षा नीति, संघ-भाजपा समन्वय, हिन्दू राष्ट्र और स्वदेशी जैसे विषयों को छुआ। वहीं उन्होंने भाजपा से लेकर विपक्ष तक के आरोपों पर इशारों-इशारों में बहुत कुछ कह दिया। काशी और मथुरा के मामले में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि संघ राम मंदिर आंदोलन से सीधे तौर पर जुड़ा था लेकिन संघ अब किसी और आंदोलन में शामिल नहीं होगा। अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद देशभर में कई स्थानों पर मंदिर-मस्जिद विवाद उठने पर उन्होंने कहा था कि हमें हर मस्जिद में मंदिर नहीं ढूंढना चाहिए। यद्यपि उन्होंने यह कहा कि काशी और मथुरा का हिन्दुओं के लिए बहुत महत्व है। उनके स्वयंसेवक व्यक्तिगत रूप से किसी भी आंदोलन में भाग लेने को स्वतंत्र हैं। राम मंदिर निर्माण के लिए इस देश के बहुसंख्यक हिन्दुओं ने 500 वर्षों से ज्यादा संघर्ष किया है। काशी आैर मथुरा पर हमारा शुरू से ही स्टैंड रहा है कि मुस्लिम बंधुओं को उनके आस्था स्थलों की भूमि स्वयं ही सौंप देनी चाहिए। इससे समूचे देश में सद्भाव ही पैदा होगा।
धर्म, संस्कृति और पूजा पद्धति को लेकर पूछे गए सवाल पर सरसंघचालक ने कहा कि हिंदू कहो या हिंदवी एक ही बात है। हिंदू मुस्लिम सब एक ही हैं। सिर्फ पूजा पद्धति बदली है और कुछ नहीं। हमारी आइडेंटिटी एक ही है। हमारी संस्कृति, पूर्वज एक ही हैं। सिर्फ अविश्वास के चलते मन में शंका होती है, इस्लाम यहां पर है और यहां रहेगा ये हिंदू सोच है। दोनों धर्मों में ये कॉन्फिडेंस जगाना होगा। पहले भी कहा गया है कि रिलीजन बदलने से कौम नहीं बदलती। शहरों और रास्तों का नाम आक्रांताओं के नाम पर नहीं होने चाहिए। आप ये मत समझें कि हमने मुसलमानों के लिए बोला है। जो देशभक्त मुस्लिम हैं, उसके नाम पर रखना चाहिए। मुसलमान को भी समझना होगा हम पूजा पद्धति से अलग हंै। जब ये भावना मुस्लिम समाज में पैदा हो जाएगी तो हिन्दू समाज तो भाईचारे के लिए सदा से राह देख रहा है।
अमेरिका द्वारा टैरिफ थोपे जाने के संदर्भ में संघ प्रमुख ने स्वदेशी का मंत्र फिर दोहराया। उन्होंने सरल उदाहरण देकर कहा कि जब हमारे पास स्वदेशी शिकंजी है तो फिर कोका कोला, स्प्राइट वगैरह क्यों पियें। संघ प्रमुख की इन पंक्तियों का मूल सार यह था कि जिस तरह अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में संघर्ष बढ़ रहे हैं तो देशवासियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य है स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना (विदेशी वस्तुओं के स्थान पर देश में बने उत्पादों को खरीदना। अपने देश के ग्रामीणों और शहरी उद्योगों का समर्थन करना, देश की आत्मनिर्भरता को बढ़ता है। 75 वर्ष की आयु में राजनीतिज्ञों की सेवा निवृत्ति के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि 75 साल में रिटायरमेंट होने की जरूरत नहीं। न मैं रिटायर होउंगा और न ही किसी को रिटायर होने के लिए कहूंगा। उनके इस वक्तव्य को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जोड़कर देखा जा रहा है। संघ प्रमुख और प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं 75 वर्ष के हो रहे हैं इसलिए राजनीतिक क्षेत्रों में अटकलों का बाजार गर्म था लेकिन उन्होंने सभी अटकलों पर विराम लगा दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हरी झंडी दिखा दी है। वैसे भारतीय संस्कृति में ऐसी रूढ़ीवादी धारणा बनी हुई है कि 60 वर्ष की आयु होते ही लोग कहने लगते हैं कि अब आप को शांति से घर बैठ जाना चाहिए। अब आपकी उम्र हो गई है। मेरी अपनी राय यह है कि जब तक शरीर में काम करने की क्षमता है तब तक आपको काम करते रहना चाहिए। भले ही आप नौकरी से सेवा निवृत्त हो भी जाएं तो भी समाज में बहुत से काम हैं जिनमें आप अपना योगदान दे सकते हैं। वैसे भी किसी राजनीतिज्ञ का रिटायर होने या न होना संगठन के फैसलों पर निर्भर करता है। श्री मोहन भागवत जी ने जन्मदर का उल्लेख करते हुए कहा कि कम से कम तीन संतानें होनी चाहिएं। जिनकी 3 संतानें नहीं हुईं वो लुप्त हो गए। यह वक्तव्य उनका नया नहीं है। हिन्दू राष्ट्र के मुद्दे पर उन्होंने अपना स्टैंड दोहराया कि भारत पहले से ही हिन्दू राष्ट्र है। इसे घोषित करने की जरूरत नहीं। संघ शुरू से ही कहते रहा है कि भारत में रहने वाले सभी हिंदू हैं। वह मुस्लिम, ईसाई या दूसरे धर्म मानने वालों को भी हिंदू मानते हैं। संघ का मानना है कि सबकी पूजा पद्धति अलग है लेकिन सब हिंदू हैं और सबके पूर्वज हिंदू रहे हैं। संघ प्रमुख पहले भी कह चुके हैं कि सबका डीएनए एक है। अब फिर संघ प्रमुख ने अखंड भारत पर जोर देते हुए सबको हिंदू बताया है।
संघ आैर भाजपा के समन्वय को लेकर उठे सवालों का जवाब उन्होंने यह कहकर दिया कि संघ किसी पर दबाव नहीं बनाता। संघ पूरी तरह से स्वावलम्बी है और वह किसी के आगे हाथ नहीं फैलाता। उन्होंने साफ संदेश दिया कि वे दूसरे संगठनों को सुझाव तो देते हैं लेकिन फैसले वे अपनी मर्जी से लेते हैं। यह कहकर उन्होंने सांकेतिक रूप से भाजपा को नसीहत भी दे दी है कि राजनीति हो या कुछ आैर संघ के विचारों को नहीं छोड़ना चाहिए। आरएसएस समय-समय पर संवाद करता रहता है और उसका मकसद यही होता है कि जो भी चर्चा हो वो जानकारी के आधार पर हो। किसी धारणा के आधार पर नहीं। संघ प्रमुख ने संदेश दिया कि स्वभाविक धर्म समन्वय है संघर्ष नहीं। इसलिए इस देश में सभी धर्मों के लोगों को आपस में संघर्ष नहीं करना चाहिए आैर एकजुट होकर देश के विकास में योगदान देना चाहिए।

Advertisement
Advertisement W3Schools
Author Image

Aditya Chopra

View all posts

Aditya Chopra is well known for his phenomenal viral articles.

Advertisement
×