ट्रम्प की दादागिरी और भारत
यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि1947 में आजादी प्राप्त करने के बाद 1991 तक भारत ने जो भी बहुआयामी तरक्की की वह अमेरिका के सहयोग के बिना ही की। 1990 में सोवियत संघ के विघटन के बाद इन परिस्थितियों में अन्तर आया और भारत ने अमेरिका की तरफ भी देखना शुरू किया। इसके परिणामस्वरूप 2024 आते-आते भारत और अमेरिका के बीच विभिन्न क्षेत्रों में आपसी आर्थिक व सैनिक सहयोग बढ़ा। मगर इसका मतलब यह नहीं निकलता कि भारत अमेरिका की कृपा पर निर्भर होता चला गया। 1991 में भारत द्वारा आर्थिक उदारीकरण शुरू किये जाने के बाद भारत का विशाल बाजार अमेरिका के लिए आकर्षण का केन्द्र बना और अमेरिका भारत के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी प्राप्त करने का स्थान। मगर अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प यदि यह सोच रहे हैं कि वह भारतीय आयातित माल पर 50 प्रतिशत सीमा शुल्क लगा कर भारत की अर्थव्यवस्था को छिन्न-भिन्न कर सकते हैं तो बहुत बड़ी गलती पर हैं।
भारत तब भी नहीं झुका था जब 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान अमेरिका ने पीएल-480 के तहत भारत को अन्न देना बन्द कर दिया था। पाकिस्तान ने यह युद्ध पूरी तरह अमेरिकी हथियारों के मार्फत लड़ा था। इसके बावजूद उसकी जबर्दस्त शिकस्त हुई थी। इसके बाद 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच बंगलादेश युद्ध हुआ जिसमें भारत ने पाकिस्तान को इस तरह पराजय दी कि पूरा पाकिस्तान बीच से अलग हो गया और इसके दो टुकड़े हो गये। एक टुकड़ा अब बंगलादेश कहलाता है। इन दोनों युद्धों में अमेरिका पाकिस्तान की तरफ खड़ा रहा और भारत को धमकाने का काम करता रहा परन्तु भारत ने अपनी शर्तों पर दोनों युद्धों को रोका परन्तु अब ट्रम्प कह रहे हैं कि विगत मई महीने में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ आॅपरेशन सिन्दूर शुरू करके जो संक्षिप्त युद्ध लड़ा उसका विराम उनकी मध्यस्था के कारण ही हुआ। ट्रम्प ने 35वीं बार एेसा दावा किया है कि विगत दस मई को उनके हस्तक्षेप की वजह से ही भारत-पाक के बीच युद्ध विराम हुआ। ट्रम्प यह कहते-कहते यह भी कह गये कि उन्होंने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर बातचीत की और पाकिस्तानी हुक्मरानों से भी बात की और चेतावनी दी कि वे दोनों परमाणु युद्ध की तरफ अग्रसर न हों और 24 घंटे के भीतर युद्ध रोक दें।
ट्रम्प का दावा है कि उनके हस्तक्षेप करने और यह कहने के बाद कि अगर ऐसा नहीं होता है तो वह दोनों देशों के माल पर इतना शुल्क लगा देंगे कि दोनों का सिर घूमने लगेगा। पहले तो ट्रम्प की यह भाषा कूटनीतिक मर्यादाओं के एकदम विरुद्ध है। दूसरे प्रधानमन्त्री मोदी संसद के पटल पर यह चुके हैं कि आॅपरेशन सिन्दूर पर उनकी विश्व के किसी भी नेता से किसी प्रकार की वार्ता नहीं हुई और भारत ने युद्ध विराम पाकिस्तान की प्रार्थना पर किया। सवाल यह है कि ट्रम्प बार-बार यह क्यों कह रहे हैं कि उन्होंने ही भारत-पाक संघर्ष को रुकवाया? इसके कई कारण हो सकते हैं। सबसे पहला तो यही है कि वह विश्व शान्ति के लिए नोबेल पुरस्कार लेना चाहते हैं क्योंकि ट्रम्प दावा कर रहे हैं कि उन्होंने पूरी दुनिया में चल रहे अन्तर्देशीय संघर्षों को रुकवाने में सात बार सफलता हासिल की। दूसरा यह कि वह अपने देश अमेरिका के लोगों की ही अपने बारे में ऊपजी अवधारणा को सही करना चाहते हैं और पूरी दुनिया को सन्देश देना चाहते हैं कि अमेरिका विश्व शान्ति के लिए समर्पित देश है। जबकि हकीकत यह है कि विभिन्न देशों को हथियार सप्लाई करने के मामले में अमेरिका नम्बर एक देश माना जाता है। दूसरी तरफ अमेरिका में पहुंचे अप्रवासी भारतीयों की धाक बनी हुई है। व्यापार से लेकर अमेरिकी कार्पोरेट जगत व प्रशासन में इन भारतीयों की भागीदारी अहम मानी जाती है। मगर ट्रम्प चाहते हैं कि अमेरिका दोबारा से महान देश बने। इसका अर्थ निकलता है कि विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद अमेरिका अब महान देश नहीं रहा है।
सवाल उठता है कि क्या अमेरिका भारत जैसे देश पर 50 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाने के बाद महान देश बनेगा। एेसा करके ट्रम्प भारत को अपनी धौंस में रखना चाहते हैं। एेसा वह इसलिए कर रहे हैं जिससे प्रधानमन्त्री मोदी के भारत में इकबाल को प्रभावित किया जा सके। वह अपने इस उद्देश्य में कभी सफल नहीं हो सकते क्योंकि भारत आजादी के बाद से ही 1991 तक अमेरिका के निशाने पर रहा और उसने हर तरीके से पाकिस्तान की खुली मदद की। इसके बावजूद आज पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है और भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ट्रम्प भारत पर 50 प्रतिशत सीमा शुल्क लगा कर इसे नकारात्मक क्षेत्र में जाने के लिए विवश कर रहे हैं। मगर ये भारत के लोग हैं जिन्हें हर परिस्थिति का मुकाबला करना आता है। जिस अमेरिका ने भारत के आजाद होने पर इसे स्टील कारखाने लगाने तक में मदद नहीं की थी वही अमेरिका आज भारत से स्टील के सामान का आयात करता है। भारत के राजनीतिक दलों के बीच लाख मतभेद हो सकते हैं परन्तु किसी दूसरे देश के साथ जब भी भारत उलझा है तो समस्त भारतीयों ने अपने मतभेद भुला कर राष्ट्र के निर्माण में सहयोग किया है। अतः ट्रम्प यह विचार छोड़ दें कि भारत उनकी धमकी में आ सकता है। हम वसुधैव कुटुम्बकम् के हिमायती मुल्क हैं और मानते हैं कि विश्व के प्रत्येक देश को उसका वाजिब हक मिलना चाहिए। यह कार्य परस्पर सहयोगा से ही हो सकता है इसलिए जरूरी है कि माननीय ट्रम्प महोदय अपनी चाल बदलें और दुनिया को बतायें कि भारत-पाकिस्तान को वह एक ही श्रेणी में नहीं रख सकते क्योंकि आज भी अमेरिका समेत पूरे यूरोप में भारतीय युवा ज्ञान का डंका बजता है।